मन, वचन और कर्म में सरलता ही आर्जव धर्म : विक्रांत शास्त्री

ऋषभायतन अध्यात्मधाम में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
अजमेर। दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन वैशाली नगर स्थित श्री ऋषभायतन अध्यात्मधाम में उत्तम आर्जव धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। प्रातः 7 बजे जिनेंद्र अभिषेक के बाद नित्य नियम पूजा, देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, सोलहकारण पूजन एवं दशलक्षण विधान के अंतर्गत उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा-अर्चना हुई। शांतिपाठ एवं विसर्जन के बाद पं. सुनील धवल, भोपाल द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
ट्रस्ट के संयोजक प्रकाशचंद पांडया ने बताया कि पं. श्री विक्रांत शास्त्री, सोलापुर (महाराष्ट्र) एवं विधानाचार्य पं. श्री सुनील धवल, भोपाल (मध्यप्रदेश) के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं को पूजा-विधान एवं प्रवचनों का लाभ मिला।
प्रवक्ता विजय पांडया ने बताया कि शाम को भक्ति गीत-संगीत के बाद प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रवचन में पं. विक्रांत शास्त्री ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म में सरलता रखना ही आर्जव धर्म है। कपट, छल और दिखावे का त्याग कर भीतर और बाहर से एक समान रहना ही सच्चा आर्जव है।
उन्होंने संदेश दिया कि जीवन में सादगी अपनाएं, दिखावे से दूर रहें तथा मन, वचन और कर्म से सच्चे बने रहें। स्वयं के प्रति ईमानदार रहना भी आर्जव धर्म का महत्वपूर्ण अंग है।
जैन भजनों पर हुई अंताक्षरी, सम्यक ज्ञान ग्रुप विजेता
प्रवचन के बाद श्री जैनम महिला मंडल के तत्वावधान में दशलक्षण पर्व के अवसर पर जैन भजनों पर आधारित विशेष अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र नाम से तीन ग्रुप बनाए गए। जैन भजनों पर आधारित इस आनंदमय कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतियोगिता में सम्यक ज्ञान ग्रुप विजेता रहा। विजेता टीम में संजय सोनी, नविता बाकलीवाल, मनोज कासलीवाल, अंजलि सेठी, महिमा लुहाड़िया एवं पारस शामिल रहे। कार्यक्रम का संयोजन श्री जैनम महिला मंडल द्वारा किया गया।
विजय पांडया

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