ऋषभायतन अध्यात्मधाम में दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
अजमेर। दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन वैशाली नगर स्थित श्री ऋषभायतन अध्यात्मधाम में उत्तम सत्य धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की गई। प्रातः 7.30 बजे विशेष जिनेन्द्र कलशाभिषेक का आयोजन हुआ। परिसर के भव्य मानस्तंभ में विराजित जिन प्रतिमाओं का उपस्थित श्रावकों ने अभिषेक किया।
अभिषेक के बाद नित्य नियम पूजा, देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, सोलहकारण पूजन एवं पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर्व पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंडलजी पर गोला अर्पित करने के साथ दशलक्षण विधान के अंतर्गत उत्तम सत्य धर्म की विशेष आराधना की गई। शांतिपाठ एवं विसर्जन के बाद पं. सुनील धवल, भोपाल ने पूजन के छंदों का संक्षिप्त अर्थ बताते हुए पूजन के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
ट्रस्ट अध्यक्ष नरेशचंद लुहाड़िया एवं ट्रस्टी विनयचंद लुहाड़िया ने बताया कि सोलापुर, महाराष्ट्र से पधारे विद्वान पं. विक्रांत शास्त्री ने प्रोजेक्टर के माध्यम से जैन आगम के अनुसार तीन लोक की रचना, उसके स्वरूप एवं जिनालयों की संरचना का विस्तृत और रोचक विवेचन किया।
प्रवक्ता विजय पांडया ने बताया कि शाम को भक्ति गीत-संगीत के बाद प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। पं. विक्रांत शास्त्री ने कहा कि सत्य वही है जो आत्मा का हित करे। ऐसा कथन जिससे किसी को दुख पहुंचे अथवा हिंसा हो, वह उत्तम सत्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मन, वचन और काय से झूठ का त्याग करना, निंदा-चुगली और कर्कश वचनों से बचना तथा क्रोध, लोभ और भय की स्थिति में भी असत्य नहीं बोलना ही सत्य धर्म की साधना है।
उन्होंने कहा कि “आत्मा में लीन होकर, राग-द्वेष रहित होकर जगत के कल्याण के लिए सत्य में स्थिर होना ही उत्तम सत्य धर्म है।”
कार्यक्रम के बाद पं. विक्रांत शास्त्री एवं पं. सुनील धवल के निर्देशन में प्रश्नमंच आयोजित हुआ, जिसमें विजेताओं को पारितोषिक प्रदान किए गए।
आज 20 सितंबर को रात्रि 9 बजे तंबोला कार्यक्रम:
श्री जैनम महिला मंडल की ओर से ऋषभायतन जैन मंदिर में जैन तीर्थस्थलों पर आधारित ज्ञानवर्धक तंबोला कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रतिभागियों से पेन साथ लाने का आग्रह किया गया है।