“जहां सेवा की आवश्यकता होगी, वहां सबसे आगे मिलूंगी”—महापौर अनामिका शर्मा

गांधी जयंती पर एमडीएस विश्वविद्यालय में स्वच्छता अभियान का आयोजन, महापौर अनामिका शर्मा एवं कुलगुरु ने किया श्रमदान

एनएसएस विद्यार्थियों ने उद्यानों एवं मैदानों की सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश

अजमेर, 2 अक्टूबर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में स्वच्छता अभियान का आयोजन कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व एवं अजमेर नगर निगम की नवनियुक्त महापौर श्रीमती अनामिका शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।

इस अवसर पर अजमेर की महापौर श्रीमती अनामिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के आमंत्रण को स्वीकार करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समाजसेवा और जनकल्याण के कार्यों में उनकी सदैव सक्रिय सहभागिता रहेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि “सेवा कार्य के लिए जहां भी आवश्यकता होगी, मैं अग्रिम पंक्ति में उपस्थित रहूंगी। राष्ट्रसेवा के प्रत्येक कार्य के लिए मैं सदैव तत्पर हूं।” उन्होंने सभी से स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. अग्रवाल एवं महापौर श्रीमती अनामिका शर्मा ने महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रतिमा के समीप स्थित मार्ग की स्वयं सफाई कर श्रमदान किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के स्वराज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। सभागार में उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि गांधी जयंती केवल आयोजन और औपचारिकताओं का दिन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने और अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि “हमने गांधी को स्मार्ट बना दिया, गांधी को संस्थान बना दिया है, लेकिन अब हमें गांधी से संस्थान की नहीं, संस्कार की यात्रा करनी है।” जब तक गांधी हमारे संस्कारों का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक इस प्रकार के आयोजनों की सार्थकता अधूरी रहेगी। कुलगुरु ने सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, सत्याग्रह और निर्भीकता को गांधीजी के जीवन के मूल आधार बताते हुए कहा कि इन मूल्यों को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार गांधी जयंती के कार्यक्रम में सम्मिलित होने जा रहे एक वरिष्ठ प्राध्यापक ने बस में यात्रा के दौरान टिकट के पैसे देने से इनकार कर दिया। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि गांधीजी के आदर्शों की बात करने और वास्तव में उनका पालन करने के बीच के अंतर को समझना होगा। प्रो. अग्रवाल ने गांधीजी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी कमजोरियों और जीवन के अनुभवों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का साहस गांधीजी की असाधारण निर्भीकता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि हमें भी अपने जीवन में ऐसी ही ईमानदारी और आत्मस्वीकृति का भाव विकसित करना होगा। उन्होंने गांधीजी के विचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि विरोधी को शत्रुता से नहीं, बल्कि विवेक, सद्भाव और संवाद से जीतना ही गांधीवादी दृष्टिकोण है। गांधीजी का स्वराज केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि वह आत्मानुशासन और स्वयं पर शासन करने की क्षमता से भी जुड़ा था।कुलगुरु ने आह्वान किया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति गांधीजी के आदर्शों का दस प्रतिशत भी अपने जीवन में ईमानदारी से अनुपालन कर सके, तो यह उसके जीवन की बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि गांधीजी के मूल्यों को अपनाकर ही हम विश्वविद्यालय, समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दे सकते हैं। यही राष्ट्रपिता के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इससे पूर्व प्रातःकाल कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान से हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के उद्यानों एवं मैदानों की सफाई कर परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी एवं अतिथि संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अंत में कुलगुरु ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विशेष रूप से विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना की।

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