नसीराबाद के रामसर में श्रमिक मुक्त, एसडीएम के सामने दर्ज हुए बयान; बंधुआ मजदूरी की जांच जारी
नसीराबाद | 1 अक्टूबर 2026 नसीराबाद उपखंड के रामसर गांव में कर्ज के बदले लंबे समय तक श्रम करवाने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रशासन एवं राजस्थान महिला कल्याण मंडल चाचियावास के प्रयासों से श्रमिक शिवराज भील, निवासी किशनगढ़ को कार्यस्थल से मुक्त कराया गया। उसे उपखंड अधिकारी एवं उपखंड मजिस्ट्रेट नसीराबाद कल्पित शिवरान के समक्ष प्रस्तुत कर बयान दर्ज करवाए गए। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम से नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
₹29 हजार लिए, कर्ज चुकाने के लिए बेटे से कराया काम
श्रमिक द्वारा प्रशासन को दिए बयान के अनुसार उसने वर्ष 2024 में इलाज के लिए ₹29,000 का कर्ज लिया था। इसके बाद कर्ज चुकाने के लिए उसके बेटे को काम पर रखा गया। शिवराज के अनुसार उसके बेटे से प्रतिदिन करीब 17 घंटे तक 40-45 भैंसों की देखभाल और चराने का काम करवाया जाता था। काम के बदले मिलने वाली राशि कर्ज की कटौती के रूप में बताई जाती थी।
बयान में यह भी सामने आया कि बेटे के साथ कथित रूप से मारपीट और गाली-गलौज की जाती थी। कुछ समय बाद बेटा वहां से निकल गया, लेकिन श्रमिक के अनुसार उसे दोबारा काम पर लगाया गया।
बेटे की जगह पिता से भी करवाया काम
शिवराज के बयान के अनुसार बाद में बेटे के स्थान पर उससे स्वयं काम करवाया जाने लगा। उसने बताया कि लगभग एक वर्ष तक उससे प्रतिदिन करीब 17 घंटे काम करवाया गया और इसके बदले उसे केवल ₹1,000 से ₹1,500 प्रतिमाह दिए जाते थे। सामाजिक और पारिवारिक कार्यों के लिए जाने पर भी रोक होने की बात उसने अपने बयान में कही है।
शिवराज के अनुसार जब वह वहां से निकलकर अपने पिता के पास पहुंचा तो उस पर ₹75,000 बकाया होने की बात कही गई और दोबारा काम पर आने का दबाव बनाया गया। उसने धमकी दिए जाने तथा उसके और उसके बेटे के अंगूठे लेकर करार बनाए जाने की बात भी प्रशासन को बताई है।
मामले में रामसर निवासी तैयब खत्री का नाम श्रमिक द्वारा मालिक के रूप में बताया गया है। हालांकि, यह आरोप जांच के अधीन हैं।
बंधुआ मजदूरी में क्या कहता है कानून?
बंधित श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 का उद्देश्य बंधुआ मजदूरी व्यवस्था को समाप्त करना और आर्थिक एवं शारीरिक शोषण से कमजोर वर्गों की रक्षा करना है। अधिनियम के तहत कर्ज या एडवांस के बदले ऐसी बाध्यकारी श्रम-व्यवस्था, जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो, बंधुआ मजदूरी के दायरे में आ सकती है।
ऐसे मामलों में केवल श्रमिक को कार्यस्थल से निकालना ही पर्याप्त नहीं है। पहचान, मुक्ति, संरक्षण, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
सरकार की पुनर्वास योजना में आर्थिक सहायता का प्रावधान
केंद्र सरकार की Central Sector Scheme for Rehabilitation of Bonded Labourer-2021 के तहत बंधुआ मजदूरी प्रमाणित होने पर श्रमिक की श्रेणी और शोषण की स्थिति के अनुसार ₹1 लाख, ₹2 लाख या ₹3 लाख तक पुनर्वास सहायता का प्रावधान है। वयस्क पुरुष लाभार्थी के लिए सामान्य प्रावधान ₹1 लाख है।
इसके अलावा, मामले की प्रक्रिया के दौरान यदि तत्काल सहायता की जरूरत हो तो भोजन, आवास, चिकित्सा, कानूनी सहायता तथा पीड़ित/गवाह संरक्षण जैसी सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। जिला स्तर पर बंधुआ श्रमिक पुनर्वास निधि से तत्काल आर्थिक सहायता ₹30,000 तक दी जा सकती है।
अब प्रशासन की रिपोर्ट पर नजर
फिलहाल एसडीएम नसीराबाद की ओर से शिवराज को औपचारिक रूप से बंधुआ श्रमिक घोषित नहीं किया गया है। प्रशासन द्वारा जांच एवं रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अंतिम रिपोर्ट के बाद ही मामले में बंधुआ मजदूरी की कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।