अजमेर। गुरूवार को शहर में निकाली गयी चेटींचंड की शोभायात्रा का शहर भ्रमण के दौरान सूफी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के निजाम गेट पर मौलाई कमेटी की जानिब से किये गये स्वागत में साम्प्रदायिक सौहार्द का नजारा देखने को मिला। अंजुमन गरीब नवाज सूफी मिशन सोसायटी सहित दरगाह से जूडी अन्य संस्थाओं और खादिमों की ओर से शोभायात्रा के दरगाह पहंुचने पर
पुष्पवर्षा के साथ दस्तारबंदी करते हुए परंपरागत स्वागत किया। मौलाई कमेटी की ओर से खादिम ग़नी गुर्दजी, सूफी मिशन सोसायटी से जुल्फीकार चिश्ती, अस्मत बीबी, सरवर सिद्धीकी और सबा खान आदि ने शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा कर सिंधी समाज के गणमान्य लोगों का अभिनंदन किया। इस मौके पर हाजी इंसाफ अली, नरेन शाहनी भगत, कमल बाकेालिया, वासुदेव देवनानी, कंवल प्रकाश किशनानी सहित समाज के जनप्रतिनिधियो और गणमान्य लोगो का शानदार स्वागत किया गया।
आयो लाल झूलेलाल के जयकारो के साथ चेटींचंड पर निकली विशाल शोभायात्रा में सिंधी समाज के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक संस्थाओं के द्वारा बनाई गयी लगभग 50 झाकिंया आकर्षण का केन्द्र बनी रही। महादेव शेषनाग पर, झूलेलाल पर डाक टिकिट, घोड पर बाबा रामदेव, समुद्र मंथन, पर्वतो के बीच मां के दर्शन, राक्षस वध, राधाकृष्ण, बतख पर मां सरस्वती, हवा में झूलेलाल फूल पर, झूले पर झूलेलाल, हनुमान अपने पुत्र को विराट रूप दिखाते हुए, सिंधी पाठशाला, मछली पर झूलेलाल, सांई बाबा सिंघासन पर, बोतल में जिन, झांसी की रानी, फूल पर लक्ष्मी माता जैसी झाकिंयों को देखने शहर का हूजूम शोभायात्रा के मार्ग पर घंटो खड़ा रहा। वहीं मकानों और दुकानों की छत पर भी महिला पुरूष और बच्चे घंटो शोभायात्रा के दिदार को बैठे रहे। इस बार शोभायात्रा में सिंधी युवाओं ने बढचढ कर भाग लेते हुए अनेक झांकिंयो में अपना योगदान दिया।
वहीं पुष्कर कस्बे मंे भी चेटीचंड का पर्व बडी धूमधाम से मनाया गया। छोटी बस्ती स्थित कामटीवालो की धर्मशाला से शोभायात्रा का जूलूस प्रांरभ हुआ जो नगर भ्रमण करता हुए ब्रह्मचौक स्थित सिंधी धर्मशाला पहुंचा। जहां छेज और पंजडो पर सिंधी समाज के युवाओं और महिला पुरूषों ने जमकर नृत्य किया। जूलूस का पूरे रास्ते शरबत, अल्पाहार, और पुष्पवर्षा के साथ जोरदार स्वागत किया गया। झूलेलाल घाट और वराह घाट पर नवयुवक मंडल की ओर से शरबत और प्रसादी वितरण का आयोजन रखा गया। इस मौके पर तीर्थनगरी पुष्कर आयेालाल झूलेलाल के उदघोश से गुजं उठी।
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