बहारें लौटकर फिर आती है
*कभी* हंसाती है जिंदगी तो कभी रुलाती है न जाने ये कैसे कैसे गुल खिलाती है। पतझड़ का मातम नहीं मनाता गुलशन मत भूल बहारें लौटकर फिर आती है। मंजिल ढूंढने वाले राही याद ये रखना कॉटों भरी डगर मंजिल का पता बताती है। सपने बुनते हैं तो सांसें खिलती हैं जिंदगी में सपनों का … Read more