लगभग एक दशक से फिक्स्ड रेट पर होम लोन देने से कन्नी काट रहे बैंकों को अब ऐसी कर्ज स्कीमों को बढ़ावा देना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में बैंक फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों से थोड़ी-बहुत पेनाल्टी लेकर उन्हें फिक्स्ड दर पर यह सुविधा दे सकते हैं। भारतीय रिर्जव बैंक की तरफ से गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने फिक्स्ड रेट [स्थिर दर] पर बैकिंग उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुझाव दिए हैं।
समिति ने बैंकों से कहा है कि वे फिक्स्ड रेट पर लंबी अवधि के होम लोन देने के लिए फंड जुटाने की कोशिश करें। इसके लिए पांच वर्ष से ज्यादा अवधि की सावधि जमा स्कीमों को प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही बैंकों को कहा गया है कि अगर वे फिलहाल 20 या 30 वर्षो की अवधि वाली कर्ज स्कीमों में दिक्कत है तो सात से 10 वर्ष वाली स्कीम लागू करें, जिसे आगे बढ़ाया जा सकता हो। समिति ने राष्ट्रीय आवास बैंक [एनएचबी] को सुझाव दिया है कि वह कम आय वाले वर्ग को फिक्स्ड रेट पर होम लोन देने वाले बैंकों के लिए प्रोत्साहन स्कीम लाए। साथ ही बैंक होम लोन की पूरी राशि के बड़े हिस्से [मसलन दो तिहाई] को फिक्स्ड रेट पर तय करे और शेष बची राशि पर फ्लोटिंग दर लागू करे। इससे ग्राहकों पर मासिक किस्त यानी ईएमआइ का बोझ कम पड़ेगा।
समिति की रिपोर्ट में यह बात सच पाई गई है कि जैसे ही होम लोन पर ब्याज दरों में वृद्धि होने की शुरुआत हुई, बैंकों ने फिक्स्ड रेट पर इसे देना काफी कम कर दिया। वर्ष 2002 तक आवंटित कुल होम लोन का 32 फीसद फिक्स्ड रेट पर दिए गए थे। आज महज 25 फीसद होम लोन ही स्थिर दर पर दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, होम लोन की फिक्स्ड और फ्लोटिंग दरों में 5.5 फीसद तक का अंतर है। फिक्स्ड रेट ग्राहकों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, लेकिन बैंक इसे लेकर काफी निराशाजनक रवैया अपनाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक अगर चाहे तो वह ग्राहकों से पेनाल्टी शुल्क चार्ज कर लें। लेकिन जो ग्राहक फ्लोटिंग से फिस्क्ड रेट में अपने होम लोन स्कीम को तब्दील करवाना चाहता है तो उसे इन्कार नहीं किया जाए। यह अर्थदंड सिर्फ शेष बची राशि पर ली जानी चाहिए, होम लोन की पूरी रकम पर नहीं। साथ ही पेनाल्टी की दर ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
बैंक प्रमुखों से आज मिलेंगे चिदंबरम
नई दिल्ली। वित्त मंत्री पी चिदंबरम विभिन्न क्षेत्रों को गुरुवार को सरकारी क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों [एमएसएमई], इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और आवास क्षेत्र को कर्ज बढ़ाने के संबंध में चर्चा की जाएगी। इसमें पहली छमाही में बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन और कर्ज प्रवाह की समीक्षा भी की जाएगी। खासकर बैंकों के फंसे कर्जो [एनपीए] में वृद्धि को लेकर भी वित्त मंत्री खासे चिंतित हैं।