ठेका रद होने के पीछे विदेशी हाथ

घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीएमआर को मिला माले एयरपोर्ट का ठेका रद होने से न सिर्फ भारत और मालदीव के बीच तनाव बढ़ गया है, बल्कि अब इसके पीछे विदेशी साजिश का संदेह भी गहराने लगा है। जीएमआर एयरपोर्ट के सीएफओ सिद्धार्थ कपूर ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि ठेका छिनने के पीछे किसी दूसरे देश का हाथ है। उन्होंने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे चीन की कारस्तानी हो सकती है। माले एयरपोर्ट विवाद की जानकारी देने के लिए ही जीएमआर एयरपोर्ट ने राजधानी में संवददाता सम्मेलन आयोजित किया था। यह पूछे जाने पर कि क्या इसके पीछे चीन का हाथ है, कपूर ने कहा, इस बारे में मैं निश्चित तौर पर नहीं कह सकता। लेकिन मालदीव में जो राजनीतिक हालात हैं और वहा का जो राजनीतिक ढाचा है उसे देखते हुए किसी भी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपील के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में कानूनी सलाह ली जा रही है। इससे पहले कंपनी मालदीव सरकार से अपील करेगी कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करे।

मालदीव के कड़े रुख के बावजूद जीएमआर को अब भी उम्मीद है कि इस समस्या का सौहार्दपूर्ण हल निकल जाएगा। कपूर ने कहा कि कंपनी वहा के राष्ट्रपति मुहम्मद वहीद से दोबारा संपर्क करने का प्रयास कर रही है। इस विवाद पर भारत सरकार के समर्थन का धन्यवाद देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि वह समस्या का समाधान निकालने में मदद करेगी।

27 नवंबर को मालदीव सरकार ने जीएमआर को मिला माले एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण का ठेका रद कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने इस फैसले को सिंगापुर की अदालत में चुनौती दी थी। सिंगापुर हाई कोर्ट ने तीन दिसंबर को सरकार के फैसले पर स्थगन आदेश देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का फैसला सुनाया था। मगर वहीद सरकार ने इस फैसले को मानने से इन्कार कर दिया था। मालदीव इस परियोजना का अधिग्रहण करने पर आमादा है। 50 करोड़ डॉलर की इस परियोजना पर भारतीय कंपनी 25 करोड़ डॉलर खर्च कर चुकी है।

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