चीनी को महंगा करने की तैयारी

sugarनई दिल्ली। गन्ना बुवाई घटने से चीनी उत्पादन में कमी आना तय है। फिर भी सरकार चीनी आयात को महंगा करने की सोच रही है। आने वाले दिनों में इसका खामियाजा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है। यानी चीनी और महंगी होगी। गन्ना वर्ष 2013-14 में गन्ने की खेती का रकबा लगभग पौने पाच लाख हेक्टेयर घट गया है।
इसे लेकर चीनी मिलों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे स्पष्ट है कि चीनी उत्पादन घटेगा। आपूर्ति कम होने से घरेलू बाजार में चीनी के मूल्य पर काबू पाने के लिए आयात स्वाभाविक विकल्प है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी मूल्य तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर चल रहा है। लेकिन सरकार इसका लाभ उठाने के विपरीत चीनी के आयात शुल्क में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
दरअसल, चीनी मिलों की चिंताएं भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। चीनी उत्पादन लागत में वृद्धि से उनकी मुश्किलें भी बढ़ेंगी। साथ ही सस्ती चीनी के आयात से उनकी हालत और पतली हो सकती है। मिलों के मुताबिक पिछले तीन चीनी वर्षो के दौरान गन्ना मूल्य में 14 फीसद की वृद्धि हुई है, वहीं चीनी मूल्य सिर्फ तीन फीसद बढ़े हैं। इसी वजह से उन्होंने सरकार से चीनी आयात शुल्क बढ़ाने का अनुरोध किया है।
सूत्रों का कहना है कि कृषि मंत्री शरद पवार ने इस बारे में एक पत्र वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लिखा है। सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। फिलहाल चीनी आयात पर 10 फीसद का शुल्क लगता है। चीनी उद्योग को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने की सिफारिश करने वाली सी रंगराजन समिति ने यह भी कहा था कि उपभोक्ताओं के हित में चीनी आयात पर 0-10 फीसदी तक ही शुल्क लगाया जाए।
इससे घरेलू उत्पादन घटने की दशा में चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। आगामी पेराई सीजन में चीनी उत्पादन की लागत में वृद्धि को देखते हुए चीनी आयात की संभावना अधिक है, जिसे लेकर मिल मालिकों में घबराहट है।

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