*शिक्षा मंत्री का स्तीफा सरकार की हार या रणनीति*

दिल्ली में जंतर-मंतर पर काकरोच पार्टी का धरना प्रदर्शन आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार ने समझदारी भरा फैसला लिया।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के स्तीफे पर काकरोच पार्टी संस्थापक अभीजीत दीपके ने कहा कि *झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए*।यह बयान दीपके का घमंड ही लगता है। *शेर भी झुकता है।शेर के झुकने … Read more

भारतीय सेना और सैनिकों की गौरव गाथा

निसंदेह कारगिल संघर्ष दुनियांभर के पहाड़ी इलाकों में अत्याधिक ऊंचाई पर लड़ी गई लड़ाईयों में से एक लड़ाई है। कारगिल संघर्ष परमाणु बम शक्ति सम्प्पन भारत पाकिस्तान के बीच हुआ पहला सशस्त्र युद्ध था। । जहाँ 1965 में हम लाहोर तक पहुच गये और पाकिस्तान के होंसले पस्त करदिए थे इस युद्ध की परिणीती तास्क्न्द … Read more

100 जूते भी खाएंगे और 100 प्याज भी खाएंगे

मैं जब सर्विस में था तब की बात है। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल चल रही थी। कांग्रेस का शासन था और भैरों सिंह शेखावत विपक्ष के नेता थे। भैरों सिंह जी ने कहा कि यह वह सरकार है, जो 100 प्याज भी खायेगी और 100 जूते भी खायेगी। फिर उन्होंने उसको विस्तार से बताया कि … Read more

व्यक्ति-क्रांति से धर्म-क्रांति के पुरोधा: युगद्रष्टा आचार्य भिक्षु

भारतीय आध्यात्मिक परम्परा में कुछ महापुरुष ऐसे हुए हैं जिन्होंने केवल धर्म का उपदेश नहीं दिया, बल्कि धर्म की आत्मा को पुनः प्रतिष्ठित किया। वे परम्परा के अनुयायी भर नहीं बने, बल्कि समय की आवश्यकताओं के अनुरूप धर्म को नया जीवन, नई दृष्टि और नई दिशा दी। ऐसे ही युगद्रष्टा थे आचार्य श्री भिक्षु। उन्होंने … Read more

सैनिक से साहित्यकार तक का प्रेरणादायक सफर

सैनिक कवि – गणपत लाल उदय सेवारत – केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (भारत सरकार) अजमेर, राजस्थान भारतीय समाज में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं, जो एक साथ राष्ट्र रक्षा और राष्ट्र निर्माण के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समान रूप से योगदान देते हैं। ऐसे ही एक विलक्षण व्यक्तित्व हैं गणपत लाल उदय, जिनकी पहचान … Read more

जो शब्दों से सेतु बनाता रहे- प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ : एक शांत साधक की उज्ज्वल विरासत

कुछ व्यक्तित्व समय के साथ समाप्त नहीं होते, वे समय का ही हिस्सा बन जाते हैं। उनका जीवन एक तिथि में सिमट सकता है, पर उनकी उपस्थिति नहीं। वे अपनी रचनाओं, अपने विचारों और अपने आदर्शों के रूप में पीढ़ियों तक संवाद करते रहते हैं। प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ऐसे ही साहित्य-मनीषी थे। वे … Read more

उलटबाँसी काकरोच गंदगी पैदा नहीं करते, वे केवल वहाँ होते हैं जहाँ गंदगी होती है

सुनो साधो! मैंने कहा— “कहो कबीर!” कबीर बोले— “जल्दी कहो। मुझे अपनी सुनाने जंतर-मंतर जाना है।” मैं चौंका— “अपनी सुनाने? तुम तो लोगों की सुनते थे।” कबीर हँसे— “वह पुराना ज़माना था। अब सुनने वाला कौन है? आजकल सब अपनी-अपनी सुनाने में लगे हैं। मैं ही था जो सबकी सुन लेता था। अब सरकार के … Read more

जल संकट का असंतुलित प्रबंधन: अस्तित्व पर मंडराता खतरा

जल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। पृथ्वी पर जीवन की कल्पना जल के बिना असंभव है, फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल को हमारी संस्कृति ने देवत्व प्रदान किया, उसी जल के प्रति हमारा व्यवहार सबसे अधिक लापरवाह रहा है। आज देश और दुनिया की … Read more

स्व-देखभालः स्वस्थ व्यक्ति से विश्वकल्याण की भारतीय दृष्टि

अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस (24 जुलाई) पर विशेष मानव सभ्यता के विकास के इस दौर में जितनी तीव्र गति से विज्ञान, तकनीक और भौतिक संसाधनों का विस्तार हुआ है, उतनी ही तेजी से मनुष्य तनाव, अवसाद, असंतुलित जीवनशैली और अनेक नई बीमारियों के जाल में भी उलझता गया है। विडम्बना यह है कि आज मनुष्य के … Read more

सियासत संवरती है आंदोलनों से और डरती भी उन्हीं से है

देश में आंदोलन है। आंदोलन में छात्र हैं। छात्र एग्जाम देते हैं। एग्जाम में पेपर लीक हो जाते हैं। सो, गुस्सा वाजिब है। सवाल नीट का एग्जाम देने वाले 22 लाख छात्रों की मेहनत का था। भविष्य सवालों में था और व्यवस्था कठघरे में। तो, सरकार ने तत्काल कठघरे से निकलने के लिए अच्छी व्यवस्था … Read more

” हमारी यह पेंशन “

देकर अपनी जवानी के बहुमूल्य वो सारे पल खरीदीं है हमने थोड़ी सी सरकार की पेंशन, वृद्ध अवस्था में अपने चाहे साथ दे या ना दे हमें भूखें रखते नहीं कभी, हमारी यह पेंशन। दुनियां चाहे जो भी कहे पेंशन के बारे में पर पेंशन धारकों के लिए सर का ताज है पेंशन, औरों के … Read more

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