मासूम बचपन पर मजदूरी का बोझ: क्या बच्चों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं?

12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस -बाबूलाल नागा    जब किसी होटल में चाय परोसता, किसी ढाबे पर बर्तन साफ करता या ईंट-भट्टे पर काम करता बच्चा दिखाई देता है, तब केवल एक बच्चा मजदूरी नहीं कर रहा होता, बल्कि संविधान की आत्मा भी कहीं न कहीं घायल होती है। बच्चों के हाथों में किताबों और खिलौनों … Read more

राजस्थान से राज्यसभा में अनुभव, सादगी और समर्पण की नई तिकड़ी

 –    राकेश दुबे राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा चुनाव प्रायः राजनीतिक गणित, रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार का चुनाव एक अलग ही संदेश देकर गया। प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नीरज डांगी तथा भारतीय जनता पार्टी के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर का निर्विरोध निर्वाचन केवल … Read more

अपने अपने कुरुक्षेत्र में

*आवाजों का छायादार चेहरा*  *रात घर से निकलते हुए डर लगता है*  *चांद दीवार पर रखा कटा सर लगता है*     *अब्बास ताबिश का यह शे’ र हर उस समय के लिए माैजू बैठता है जब अंधेरे समूह चांद की चांदनी को डसने लगते हैं ।*  *मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा जाने के रस्ते को बाधित … Read more

राज्यसभा में निर्विरोध चयन से निखरी नीरज डांगी की राजनीतिक प्रतिष्ठा

अपने पिता की तरह नीरज भी आलाकमान के करीबी, दिनेश राय डांगी का भी  था जनता से गहरा लगाव  -विशेष संवाददाता- जयपुर। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी सहित बीजेपी के डॉ सतीश पूनिया और डॉ अलका गुर्जर का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। लेकिन दूसरी बार राज्यसभा में जा रहे नीरज डांगी … Read more

हम तो डूबेंगे, तुम्हें भी ले डूबेंगे

खुद की उपेक्षा और पायलट को आगे बढ़ते देखना गहलोत को बर्दाश्त नहीं, शीर्ष पर रहे राजनीतिक क्षत्रप उतार आने पर बौखला जाते हैं *ओम माथुर*       जब किसी राज्य में कोई राजनीतिक क्षत्रप लगातार शीर्ष पर रहता है, तो उसे ये बर्दाश्त नहीं होता है कि कोई उसे वहां से हटा दें। … Read more

*तृणमूल की बिखरी पत्तियां*

*फूलों का बिखरना तो तय था लेकिन*  *कुछ इसमें हवाओ की सियासत बहुत थी*  *ममता बनर्जी की तृणमूल या फूल की पत्तियां के बिखरने पर परवीन शाकिर का उक्त शे’र  कुछ इस तरह मानस में कौंधता है गोया शायरा ने इसी मौके के लिए यह कहा हो।*        *ममता के साथ जो क्या … Read more

नेत्रदान: अंधकार से प्रकाश की ओर सबसे बड़ा सेतु

विश्व नेत्रदान दिवस (10 जून, 2026) पर विशेषः मानव जीवन में आंखों का महत्व केवल देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हमारी चेतना, संवेदना, ज्ञान और जीवन के सौंदर्य का द्वार हैं। आंखों के माध्यम से ही हम प्रकृति की विविधता, परिवार का स्नेह, समाज की गतिविधियों और संसार की अनंत संभावनाओं का अनुभव … Read more

शोर्य पराक्रम मेवाड़ रत्न महाराणा प्रताप

इतिहास गवाह है कि मुगल सम्राट अकबर के द्वारा दिये गये झूठे आश्वासन, उच्चस्थान, पदाधिकार आदि प्रलोभनों और भय से वशीभूत होकर कई राजपतू राजाओं ने सम्राट अकबर सत्ता के सामने नतमस्तक होकर उनकी अधीनता मंजूर कर ली थी जिससे यह स्थापित हो गया कि अधिकतर राजपूत अपना गौरव खो चुके थे ऐसा प्रतीत होता … Read more

पहर-दर-पहर

तेरी यादों का मौसम रहा पहर-दर-पहर, दिल में इक दर्द पलता रहा पहर-दर-पहर। चाँद ख़ामोश था, चाँदनी भी उदास, कोई साया भटकता रहा पहर-दर-पहर। नींद आँखों की चौखट पे आकर रुकी, ख़्वाब तेरा ही सजता रहा पहर-दर-पहर। तेरी ख़ुशबू किसी नरम झोंके की तरह, मेरे कमरे में ठहरता रहा पहर-दर-पहर। दिल ने चाहा कि तुझको भुला दूँ मगर, नाम तेरा ही उभरता रहा पहर-दर-पहर। कुछ दुआएँ लबों तक तो आईं मगर, दर्द चुपचाप सुनता रहा पहर-दर-पहर। ‘राहत’ उस शख़्स की याद का क्या कहें, रूह में रंग भरता रहा पहर-दर-पहर।   ” राहत टीकमगढ़”

नरेंद्र मोदी, जनादेश की निरंतरता और भारतीय लोकतंत्र का बदलता स्वरूप

10 जून 2026 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि का दिन नहीं है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। किंतु इतिहास केवल संख्याओं से नहीं बनता; इतिहास … Read more

अनूप-शुभ्रा के सृजन के पच्चीस वर्ष

कला केवल रंगों, रेखाओं और आकृतियों का संयोजन नहीं होती, वह जीवन की अनुभूतियों, संबंधों और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति भी होती है। जब दो कलाकार अपने-अपने स्वतंत्र व्यक्तित्व, दृष्टि और शैली के साथ जीवन की यात्रा में सहयात्री बनते हैं, तब उनकी रचनात्मकता एक नए आयाम को जन्म देती है। डॉ. अनूप कुमार चांद और … Read more

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