सड़क ही हर आयोजन की जगह क्यों बन गई है?

अजमेर में खेल मैदान हैं। पटेल स्टेडियम जैसा पुराना और जाना-पहचाना स्थान भी है, जहाँ अच्छी-खासी जगह है और हाल ही में नवीनीकरण भी हुआ है। फिर भी शहर में कोई सभा हो, नाटक हो, प्रदर्शनी हो या खेल आयोजन—अक्सर सड़क बंद करके ही कार्यक्रम किया जाता है। किसी आयोजन के लिए जगह चाहिए, यह … Read more

जनता का काम सवाल करना है, जवाब देना नहीं

लोकतंत्र में हर किसी का अपना एक किरदार है। राजनीतिक दलों का काम है अपनी नीतियां बनाना, अपने फैसलों को जनता के सामने रखना और जरूरत पड़ने पर उनका बचाव करना। इसके लिए उनके पास नेता हैं, प्रवक्ता हैं और पूरी संगठनात्मक व्यवस्था है। सरकार का काम है शासन करना और जनता के सवालों का … Read more

जब पार्टी को ही अपने उम्मीदवारों पर भरोसा न हो

चुनाव में पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों के लिए जनता से भरोसा माँगती हैं। कहती हैं कि इन्हें चुनिए, ये आपकी आवाज़ बनेंगे। लेकिन जब चुनाव के आसपास उन्हीं उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी की खबर आती है, तो एक सवाल उठता है—क्या पार्टी को डर है कि जीतने के बाद वे उसका साथ छोड़ देंगे? बाड़ेबंदी के पीछे … Read more

सवाल वही, किरदार बदल गए

Sochne Wali Baat Hai

हम अक्सर कहते हैं कि सत्ता और व्यवस्था से सवाल होने चाहिए—काम समय पर क्यों नहीं हुआ? जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कानून की कमियों का फायदा उठाकर हर बार कोई न कोई कैसे बच जाता है? सवाल बहुत होते हैं, आवाज़ें भी उठती हैं, लेकिन फिर भी कुछ बदलता हुआ दिखाई नहीं … Read more

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