कविता में पिरोया गीता का सार-सुरेन्द्र दुबे का कमाल

surendra dubeआमतौर पर कविताओं में तुकबंदी का बोलबाला होता है, जो कवि जितनी तुकबंदी कर देता है, वह उतना ही प्रसिद्ध हो जाता है। वैसे भी  अब टीवी संस्कृति के कारण कवि और कविताओं का महत्त्व लगातार घट रहा है। अब पहले की तरह बड़े-बड़े कवि सम्मेलन भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कवि और कविता दोनों ही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे ही दौर में देश के ख्यातनाम कवि सुरेन्द्र दुबे ने अपनी कविताओं में एक नया प्रयोग किया है। सुरेन्द्र दुबे अजमेर जिले के ब्यावर कस्बे से निकलकर देश के शिखर पर पहुंचे हैं। 14 अप्रैल को अजमेर के टाउन हॉल में अजयमेरु प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एक काव्य संगोष्ठी में सुरेन्द्र दुबे ने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवाई। दुबे ने बताया कि इन दिनों वे जयपुर में रह रहे हैं और जयपुर में रहते हुए उन्होंने वेद का गहन अध्ययन किया। वेद के अध्ययन के बाद से उन्होंने भागवत गीता को समझने की कोशिश की। चूंकि वे मन से कवि है इसलिए गीता में सभी 18 अध्यायों पर अपनी कविताओं को लिखा। यानि गीता के ज्ञान को शब्दों में पिरोकर कविताएं लिखी। संगोष्ठी में दुबे ने गीता के 12वें अध्याय के अनुरूप लिखी कविता को भी सुनाया। गीता के 12वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपने विराट स्वरूप के दर्शन कराए। इसके बाद ही अर्जुन युद्ध के लिए तैयार हुआ। अपनी कविताओं के माध्यम से सुरेन्द्र दुबे ने भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप का चित्रण किया। वे अपने आप में काबिले तारीफ है। स्वयं भगवान ने यह माना कि अर्जुन के आग्रह पर ही वे अपने दिव्य स्वरूप को दिखा रहे हैं। इसके लिए कृष्ण ने अपने शिष्य अर्जुन को वो नेत्र प्रदान किए, जिनके माध्यम से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को देखा जा सके। जिन लोगों ने गीता पढ़ी या किसी कथावाचक के माध्यम से सुनी उन्हें पता है कि भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप में क्या-क्या ज्ञान दिया गया है। इन सब को शब्दों के आधार पर कविता में लिखना बेहद ही कठिन कार्य रहा होगा। नदी जब पहाड़ों से निकलकर मैदान में पहुंचती है तो उसे अपनी ताकत पर गुमान होता है, लेकिन जब वही नदी समुन्द्र में जाकर समाती है तो उसे पता चलता है कि समुन्द्र के सामने उसका कोई अस्तित्व नहीं है। इसमें कोई दोराय नहीं कि दुनिया भार में भागवत गीता का अपना महत्त्व है। दुनिया भर के साहित्यकार और विद्वान अब हमारे इसी ग्रंथ को समझने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सुरेन्द्र दुबे का गीता का अध्यायों पर कविताएं लिखना कमाल का काम है। मेरी लम्बे अर्से बाद सुरेन्द्र दुबे से मुलाकात हुई। मैं सुरेन्द्र दुबे को एक ख्यातनाम कवि के रूप में जानता था, लेकिन 14 अप्रैल को मुझे पता चला कि अब सुरेन्द्र दुबे कवि नहीं रहे हैं। गीता को समझने के बाद उनके जीवन में जो बदलाव आया है। उससे वे एक साधारण इंसान बन गए हैं। दुबे ने बताया कि गीता के सभी 18 अध्यायों पर जो कविता लिखी गई है। उनका एक संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। नि:संदेह गीता पर आधारित यह काव्य संग्रह भारतीय साहित्य के लिए उल्लेखनीय होगा। क्योंकि यह काव्य दुबे ने कविता की तुकबंदी के अनुरूप नहीं लिखा है, बल्कि गीता को पढऩे से पहले वेदों का ज्ञान भी अर्जित किया। दुबे ने कहा कि उसे सभी 18 अध्यायों पर लिखी कविता कंठस्त है। वे बिना देखे कविताओं को धारा प्रवाह सुना सकते है। अपनी लिखी कविताएं तो कोई भी कवि सुना सकता है, लेकिन ज्ञान से भरी गीता पर लिखी कविताओं को बिना देखे सुनाना कमाल का काम है। मैंने मेरा यह लेख सुरेन्द्र दुबे पर इन भावनाओं के साथ लिखा है कि वे अब अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में तुकबंदी वाली कविता सुनाने के बजाए गीता पर आधारित कविताओं को ही सुनाए। हो सकता है कि इससे उनकी कमाई पर कुछ असर पड़ जाए, लेकिन भारतीय समाज को अपनी कविताओं के माध्यम से गीता को समझाने का जो काम सुरेन्द्र दुबे करेंगे, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। मैं यहां सुरेन्द्र दुबे के मोबाइल नम्बर लिख रहा हंू। जो लोग मेरी भावनाओं से जुड़कर सुरेन्द्र दुबे से संवाद कर सकते हैं, उन्हें जरूर करना चाहिए। जब हम भागवत गीता का कथावाचन करने वालों को संत और भगवान का दर्जा दे देते हैं तो कम से कम सुरेन्द्र दुबे की हौंसला अफजाई जो कर ही सकते हैं। सुरेन्द्र दुबे का मोबाइल नम्बर 09829070330 है। रुचि रखने वाले लोग सुरेन्द्र दुबे से फेसबुक के माध्यम से भी संवाद कर सकते हैं। गीता पर आधारित काव्य संग्रह को अपार सफलता मिले, ऐसी मेरी भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

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