डॉ शर्मा के प्रयास रंग लाये, अस्पताल की व्यवस्थाओं में काफी सुधार

*केकड़ी_अजमेर* (26.4.2019)
चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के प्रयास रंग लाने लगे हैं, केकड़ी अस्पताल के हालात पहले से बहुत बेहतर हो गए हैं। अस्पताल में अधिकांश चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगी है। सिटी डिस्पेंसरी के रूप में पुराने अस्पताल में डॉक्टर व स्टाफ बैठने लगा है साथ ही होम्योपैथी की अधिकांश दवा सिटी डिस्पेंसरी में उपलब्ध कराई जा रही है। अब क्षेत्र के लोगों को हर छोटी-मोटी बीमारी के लिए रैफर कर दिए जाने की प्रवर्ति पर रोक लगी है। करीब-करीब सभी प्रचलित बीमारियों के करीब 24 डॉक्टर अस्पताल में नियुक्त हैं। लम्बे समय बाद यहां डॉक्टरों की निर्धारित समय तक अस्पताल में उपस्थिति रहती है। अस्पताल की साफ सफाई में भी पहले से काफी सुधार आया है। अस्पताल में अधिकांश बीमारियों की दवा उपलब्ध रहने लगी है। लोगों को बाहर से दवा पहले से बहुत ख़िरीदनी पड़ रही है वो भी तब जब दवा जरूरी हो और अस्पताल में उपलब्ध न हो। हालांकि कई लोगों का कहना है कि अस्पताल में पहले से बेहतर स्थिति है, लेकिन अब भी अक्सर कई डॉक्टर आउटडोर चैम्बर से कई घण्टों तक नदारद रहते हैं। उनकी इंतजार में बैठे मरीजों को परेशानी होती है। वहीं लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरी है, लेकिन पार्किंग स्थल की सुविधा माकूल नहीं है मरीजों व उनके परिजनों को अपने दुपहिया वाहन अस्पताल के बाहर मुख्य द्वार के पास रखने पड़ रहे हैं जो बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। एक तो स्टेट हाईवे होने की वजह से भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, हमेशा दुर्घटना का भय बना रहता है ऐसे में अस्पताल के बाहर सड़क किनारे सैंकड़ों दुपहिया वाहनों के आड़े-तिरछे खड़े करने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं मुख्य द्वार पर वाहनों के आड़े-तिरछे खड़े रहने से चौपहिया व एम्बुलेंस में लाये जाने वाले वाहन आसानी से अस्पताल में प्रवेश नहीं हो पाते। लोगों ने बताया कि पहले तो वाहन अस्पताल परिसर में पार्क किये जाते थे लेकिन अब अंदर पार्किंग पर शुल्क लगने लगा है तो लोग शुल्क बचाने के लिए अस्पताल के बाहर अपने वाहन खड़े करने लगे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के साथ अन्यत्र जाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। मरीजों को घण्टों तक पर्ची के लिए लाइन में खड़े रहना पड़ता है। पर्ची काउंटर पर मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। अस्पताल में महिला रोगियों को काफी राहत मिली है स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुमन माथुर के आने के बाद अब सिजेरियन डिलवरी भी यहां होने लगी है। लेकिन वरिष्ठ सर्जन की कमी के चलते बड़े ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं ऐसे में मरीजों को अन्यत्र शहर जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि चिकित्सा स्टाफ की कमी की वजह से चिकित्सा सुविधाएं अपेक्षाकृत नहीं मिल रही है। लम्बे समय से सोनोग्राफी मशीन बन्द होने के बाद शुरू तो हो गई मगर फिर भी लोगों को सोनोग्राफी कराने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टर के लिखने के बावजूद सोनोग्राफी के लिए कई दिन तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। रोजाना करीब 8 सौ से हजार मरीज आउटडोर में इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल समय में हर डॉक्टर के चैम्बर में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि अस्पताल समय बाद अधिकांश डॉक्टरों के घरों पर भी मरीजों की भीड़ लगी रहती है। कहने को तो अस्पताल में 24 डॉक्टर तैनात हैं लेकिन आउटडोर में तो 4-5 डॉक्टर ही उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में कोई ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए ताकि अस्पताल में पहुंचने वाले पीड़ित व्यक्ति को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। क्योंकि अस्पताल जाने वाला व्यक्ति पहले से अपनी या अपने परिजन की बीमारी से परेशान होकर वहां पहुंचता है ऐसे व्यक्ति को अस्पताल में हर तरह से राहत मिलनी चाहिए। में मानता हूं बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को सुधारने में वक्त लगता है। विभाग के आला अधिकारी अस्पताल की तमाम व्यवस्थाओं को गम्भीरता से सुधार करने के प्रयासों में लगे हैं, उम्मीद है कि शीघ्र ही विभाग चिकित्सा मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के मुख्यालय पर स्थित 150 बेड के अस्पताल में हर छोटी-मोटी अव्यवस्थाओं को शीघ्र दूर करने के प्रयास करेगा। वैसे भी चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देशानुसार केकड़ी अस्पताल को जिला स्तर का अस्पताल बनाने की कार्यवाही तेजी से चल रही है। उम्मीद की जा रही है शीघ्र ही क्षेत्रवासियों को यहां जिला स्तर की चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगेंगी। मगर फिलहाल छोटी-मोटी खामियों को दूर करने की दरकार है।

तिलक माथुर
*9251022331*

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