धर्मेन्द्र गहलोत इतने चुप भी नहीं बैठे हैं, जितने माने जा रहे हैं

राज्य में सरकार बदलने के बाद पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार अजमेर नगर निगम में आयुक्त चिन्मयी गोपाल सक्रिय व चर्चा में हैं, ऐसा माना जा रहा है कि मेयर धर्मेन्द्र गहलोत मौके नजाकत को देखते हुए चुप हैं। ऐसा स्वाभाविक भी है, क्योंकि जितनी स्वतंत्रता गहलोत को भाजपा सरकार के दौरान मिली हुई थी, उस पर अब कांग्रेस सरकार में अंकुश लगा है। स्वयं गहलोत भी जानते हैं कि सरकार से टकराव लेने में कोई फायदा नहीं है, लिहाजा बेहतर ये है कि बाकी के कार्यकाल में अपनी चिर परिचित आक्रामकता छोड़ी जाए। ऐसा दिखाई भी दे रहा है कि वे अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए टकराव को टालते हैं। बावजूद इसके अपने स्वभाव को काबू में नहीं कर पा रहे हैं। किसी न किसी मुद्दे पर आयुक्त चिन्मयी गोपाल से मतभिन्नता हो ही जाती है। ऐसे कई प्रसंग चल रहे हैं, जिनमें आयुक्त कुछ सख्ती से पेश आ रही हैं। यह उनके स्वभाव की परिणति है। वैसे भी यह तथ्यात्मक सच्चाई है कि नया आईएएस अफसर आम तौर पर सजग व सक्रिय होता है। कहावत भी है कि नया नया मुसलमान अल्ला-अल्ला ज्यादा करता है। चिन्मयी भी कुछ इसी अंदाज में अपने आईएएस होने का गुमान होने की वजह से ज्यादा मुखर नजर आ रही हैं।
खैर, बात चल रही थी गहलोत के स्वभाव में आए परिवर्तन की। जहां तक संभव है, अपनी ओर से टकराव मोल नहीं ले रहे। मगर चूंकि दूसरी बार मेयर बने हैं और पेशे से वकील हैं, इस कारण नगर निगम के कायदे-कानून की पूरी जानकारी रखते हैं। इस कारण घबरा कर दुबक नहीं गए हैं। जब भी मौका लगता है कि कानून की बारीक समझ का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही नगर निगम द्वारा लव कुश गार्डन में आम आदमी के लिए छोड़ी गई जगह पर रातों-रात ठेकेदार ने अपनी सुविधा के लिए केबिनों का निर्माण किया तो गहलोत ने आयुक्त को ठेकेदार पर कार्रवाई किए जाने के आदेश दे दिए। आयुक्त को इस मामले में बाकयदा यूओ नोट जारी किया गया है। ज्ञातव्य है कि निगम ने लव कुश गार्डन पर बनाए गए फूड कोर्ट का ठेका केवल ऊपर वाले हिस्से के लिए दिया है। गार्डन के नीचे का हिस्सा आमजन के बैठने के लिए छोड़ा गया है। ठेकेदार ने इसे भी कवर करते हुए वहां पर फूड कोर्ट में आने वाले ग्राहकों के लिए छोटी केबिन का निर्माण करवा लिया है, जबकि ठेका 38 लाख रुपए का केवल ऊपर वाले हिस्से के लिए दिया गया है। निविदा की शर्तों में साफ उल्लेख था कि गार्डन का उपयोग आमजन के लिए ही होगा। इसके बावजूद शर्तों का उल्लंघन किया गया है। गहलोत जानते हैं इस मामले में आयुक्त को कार्यवाही करनी ही होगी। इसी कारण यूओ नोट जारी किया है। इस बहाने उन्होंने यह भी जाहिर कर दिया है कि अगर चिन्मयी आयुक्त हैं तो वे भी मेयर हैं। गहलोत की यही खुद्दारी उनकी पहचान है। वैसे समझा यही जाता है कि गहलोत ज्यादा बखेड़ा नहीं करने वाले। जानते हैं कि आईएएस जब अपनी पर आते हैं तो एकजुट हो जाते हैं।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

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