एसडीएम की जन सुनवाई में नही पहुंचे 20 में से 18 पार्षद

पुष्कर के एसडीएम कार्यालय में आज उपखंड अधिकारी देविका तौमर ने जन सुनवाई का कार्यक्रम रखा । ज्यादा से ज्यादा लोगो तक जन सुनवाई की सूचना पहुंचाने के लिए बीते एक सप्ताह से इस आयोजन का जमकर प्रचार प्रसार भी किया गया । लेकिन नतीजा फिर वही निकला – ढांक के तीन पात । जनसुनवाई कार्यक्रम की हालत यह थी कि तय समय11 बजे तक कार्यालय पर एक भी व्यक्ति नही पहुंचा । मजे की बात यह थी कि दिनभर सोशल मीडिया पर पुष्कर की समस्याओं के प्रति चिंता जाहिर करके नेताओं , अधिकारियों यहां तक कि मीडिया पर भी दोषारोपण करके उन्हें कोसते रहने वाले यहां के सैकड़ो क्रांतिवीर सपूतों में से एक भी बंदे ने वहां आकर शहर की समस्याओं को बताना जरूरी नही समझा । लगभग आधे घंटे से ज्यादा वक्त तक इंतजार करने के बाद गिनती के 10 , 12 लोग वहां पहुंचे उनमे से भी 3 , 4 लोगो को छोड़ दिया जाय तो ज्यादातर लोगों ने अपना मुंह बंद ही रखा । आखिरकार चंद लोगो की मौजूदगी में शुरू हुई जनसुनवाई आधे घंटे में ही निपट गई ।

राकेश भट्ट
*20 मे से 18 पार्षद रहे नदारद , बीजेपी – कांग्रेस के नेताओ सहित जागरूक लोगो ने भी नही दिखाई दिलचस्पी ••••*
एसडीएम देविका तौमर की जन सुनवाई में खास बात यह थी कि पुष्कर नगर पालिका के 20 में 18 वार्ड पार्षदो ने कोई दिलचस्पी ही नही दिखाई । केवल बीजेपी पार्षद महेश पाराशर और कमल रामावत ने ही यहां पहुंचकर शहर में व्याप्त गंदगी , आवारा पशुओं , सिवरेज सहित बिजली और पानी की किल्लत से जूझ रही जनता की समस्याएं बताई । बड़ा सवाल यह है कि या तो पुष्कर में पूरी तरह से राम राज्य चल रहा है जहां किसी तरह की कोई परेशानी ही नही बची है । या फिर जनता के वोट से जीतकर वार्ड पार्षद बन चुके नेताओ को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार ही नही है । यह भी हो सकता है कि उनकी नजर में ऐसी कोई समस्या ही नही है जिसे प्रशासन को बताया जा सके । पार्षदों के साथ साथ बीजेपी और कांगेस दोनो ही राजनैतिक पार्टियों के स्थानीय नेताओं ने भी जनसुनवाई में जाना जरूरी नही समझा ।

बड़ा सवाल यही है कि क्या पुष्कर के नेता केवल मलाई खाने के लिए ही पार्षद बने है । क्या चुनावो में जनता से बड़े बड़े वादे करके पार्षद बनकर पांच सालों तक सत्ता का सुख भोगने वाले नेताओ को जनता की दुःख तकलीफों से कोई मतलब नही है । क्या पुष्कर के 95 फीसदी नेताओ ने जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है या फिर वे इसे बेवकूफ समझकर केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति कर लेने के लिए उपयोग करने में माहिर हो गए है । *पार्षदों और नेताओ की जनता के प्रति बेरुखी का यह आलम तो तब है जब आने वाले दो महीनों बाद नगर पालिका के चुनाव होने वाले है । पुष्कर की आम जनता को इस घटना से नेताओ की फितरत का गंभीरता अंदाजा लगा लेना चाहिए कि चुनाव नजदीक होने के बाद भी जिन नेताओ को आपकी फिक्र नही हूँ वे आम दिनों में आपकी समस्याओ की कितनी चिंता करना तो दूर उस पर बात करना भी मुनासिब नही समझेंगे ।*

*इसीलिए पुष्कर की जनता के पास इस बार अवसर है उन्हें चुनने का जो ना सिर्फ उनकी दुःख तकलीफ समझे बल्कि उसके समाधान के लिए बार बार सरकार और प्रशासन से मशक्कत भी करते रहे । वर्ना यही हाल रहा तो ना तो कभी कोई अधिकारी जन सुनवाई करने के बारे में सोचेगा और ना ही कोई आपकी दुःख तकलीफों से वास्ता रखेगा । फैसला आपका है इसलिए जिसे भी चुने सोझ समझकर चुने •••••*

*राकेश भट्ट*
*प्रधान संपादक*
*पॉवर ऑफ नेशन*
*मो 9828171060*

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