शिक्षा को बेचने वाले ये दुकानदार नहीं सुधरेंगे

*माननीय शिक्षा मंत्री जी ऑनलाइन क्लासेस चलाने का निर्णय आपका ठीक है लेकिन काफी संशोधन की जरूरत है इसमें।* *जब तक आप पॉलिसी नहीं बनाएंगे*
*शिक्षा को बेचने वाले ये दुकानदार नहीं सुधरेंगे*

माननीय मंत्री महोदय डोटासरा जी लॉक डाउन के चलते आपने बच्चों को व्यस्त रखने व समय का सदुपयोग करने की भावना से ऑनलाइन क्लासेस चालू करने के जो आदेश दिए हैं।उसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं।निजी शिक्षण संस्थानों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है।कमाई तक तो ठीक है लेकिन उनको ये सोचना चाहिए कि क्या?कमाई के चक्कर में आप किसी के शरीर और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करोगे।4 वर्ष के मासूम बालक को आप चार घण्टे तक ऑनलाइन क्लास में बिठाओगे फिर उसको तीन घण्टे का होमवर्क दोगे जो भी उसे व्हाट्सएप पर देखकर ही करना है।क्या ये सही हो रहा है।उन मासूम बच्चों के कान,आंखे सही रहेगी?क्या ये बच्चे रेडिएशन की घातक किरणों से अपनी रक्षा कर पाएंगे?कान में ईयर फोन लगाकर और अपनी आंखें मोबाइल में गड़ाकर रखने से क्या क्या हो सकता है।इसके बारे में कई विशेषज्ञों की राय हम रोज देखते हैं।पांच साल का बच्चा यदि चश्मा लगा ले तो आगे चलकर उसकी आंखों का भविष्य क्या होगा हम सोच सकते हैं।आज किसी को बुखार है।हम डॉक्टर के पास जाते हैं वो हमें तीन दिन की डोज देते हैं।उसके पीछे लॉजिक है।क्या आप उस लॉजिक का उल्लंघन करके एक साथ दवाई ले सकते हैं?उससे क्या होगा।हमें ये बात समझ में आती है।उससे दुनिया भर के साइड इफेक्ट्स होंगे।जो हमारे शरीर को खोखला कर देंगे।सिमिलरली इन्होंने यही खेल चला रखा है।चार चार घण्टे की ऑनलाइन क्लास,फिर तीन घण्टे का होमवर्क?मेरी नजर में इससे बड़ा शोषण नहीं हो सकता किसी बच्चे का।आप उस बच्चे का बचपना छीन रहे हो।अगर सही मायने में आप शिक्षक हो तो आपने अपने बीएड और एमएड के कॉर्सेस में पढ़ा होगा कि बच्चों की अर्निंग कैपेसिटी कितनी होती है।उसको शिक्षा का कितना डोज कब देना चाहिए।और अगर आपको ये नहीं पता तो फिर आप शिक्षक नहीं हो।आप एक ऐसे व्यापारी हो जो किसी के भी साथ चीटिंग करने के लिए सदैव तैयार रहते हो।और माननीय मंत्री महोदय ये सब ये इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इनको फ़ीस चाहिए।लॉक डाउन के दौरान जो इनके संस्थान बन्द रहे।ये फीस नहीं ले सके।ये सब वसूल करने का मौका मिल गया इनको।इससे बढ़िया क्या आदेश होगा इनके पक्ष का।इन लोगों ने ये भी नहीं सोचा कि जैसे आप लोग घर में बेरोजगार बैठे हो।वैसे ही आपके स्टूडेंट्स के पेरेंट्स बैठे हैं।उनके कोई उद्योग धंधे थोड़े ही चल रहे हैं।जिनके पास दो रोटी का जुगाड़ नहीं है।उनके बच्चों को फीस जमा करवाने के मैसेज कर कर के जो आप प्रताड़ना दे रहे हो ना ये भी कानून के दायरे में बाल शोषण है। *माननीय मंत्री महोदय आप तो स्वयं साधारण परिवार के व्यक्ति हो,किसान के बेटे हो।संघर्ष करके एडवोकेट बने हो और सेवा के बल पर यहां तक पहुंचे हो।* आप कोई अच्छी पॉलिसी बनाओ।शिक्षा के नाम पर व्यापार तक भी ठीक है।लेकिन ये जो लूट मचा रखी है इस पर कंट्रोल होना बहुत जरूरी है। *मुझे नहीं लगता आने वाले सालों में कोई स्टूडेंट किसी प्राइवेट स्कूल के टीचर को सम्मान देगा।उसके मन में इतने नफरत के भाव हो जाएंगे कि उसके सामने आदर का भाव ही नहीं रहेगा।और कैसे रहेगा।* *माननीय मंत्री महोदय।आज दस हजार रुपये से कम तो कोई स्कूल फीस ही नहीं लेता।बेचारा मिडिल क्लास का बच्चा क्या पढ़ेगा।पेरेंट्स कैसे अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं।कभी उनसे पूछो सर*।मेरा तो आपसे यही विनम्र निवेदन है कि आपके रहते हुए इन बेलगाम घोड़ों पर रोक लगाओ।कोई पॉलिसी बनाओ जो शिक्षा को व्यापार तक ही सीमित करती हो लूट तक तो नहीं।यहां मैं ये स्पष्ट कर देना चाहूंगा कि मुझे किसी प्राइवेट एजुकेशन संस्थान से व्यक्तिगत प्रॉब्लम नहीं है।मेरे बच्चे भी प्राइवेट स्कूल में सेंट पॉल में पढ़ रहे हैं।अच्छी शिक्षा है,संस्कार है।लेकिन कोई पालिसी नहीं है जो आप बना सकते हैं।जय हिंद।जय भारत।

*डॉ.मनोज आहूजा एडवोकेट एवं पत्रकार।9413300227*

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