धर्मेन्द्र सिंह राठौड की मौजूदगी से मची खलबली

देष के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर नहेरू सर्किल पर आयोजित श्रद्धाजंलि सभा और उसके बाद जनजागरण के तहत महंगाई के विरोध में निकाली पद यात्रा में राजस्थान स्टेट सीडृस कारपोरेषन लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड की मौजूदगी से अजमेर के कांग्रेसी गलियारे में खलबली मच गई है। उनके अजमेर आगमन के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। उन्होंने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा जी की अध्यक्षता में आयोजित जेएलएन मेडिकल कॉलेज में नवनिर्मित आईंसीयू के वर्चुअल उद्घाटन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया एवं भवन का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान आम चर्चा थी कि उन्हें अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाना लगभग तय हो गया है, इसी कारण स्थानीय कांग्रेसियों के घुलने मिलने के लिए वे यहां आए हैं। कुछ का मानना था कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे पुश्कर सीट से लडने का मानस रखते हैं, उसी के तहत सक्रिय हुए हैं। जो कुछ भी हो मगर उनकी मौजूदगी अजमेर में राजनीतिक हचचल तो हुई ही है, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। ऐसा नहीं है कि उनके राजनीतिक प्रभाव से अजमेर के कांग्रेसी अनभिज्ञ हैं। पिछले दिनों अजमेर नगर निगम में उनकी पसंद के कुछ नए चेहरे मनोनीत पार्शद बनाए गए हैं। इतना ही नहीं हाल ही हुए उपचुनाव में उनकी भूमिका भी किसी से छिपी हुई नहीं है। इससे उनका कद और बढा है। बताया जाता है कि वे मुख्यमंत्री अषोक गहलोत के बहुत करीबी हैं। इसी कारण उनके अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। इसके लिए बने पैनल में उनका नाम टॉप पर बताया जाता है। दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि भाजपा मानसिकता के सिंधी व वणिक वोटों को साधने के लिए इन दोनों वर्गों में से किसी को मौका देने का विचार है। उंट किस करवट बैठेगा, कुछ नहीं कहा जा सकता।
बहरहाल, अगर वे किसी नियोजित एजेंडे के तहत अजमेर में सक्रिय हो रहे हैं तो उसका असर यहां पहले से स्थापित राजपूत नेता महेन्द्र सिंह रलावता पर पड सकता है। ज्ञातव्य है कि रलावता एक बार फिर अजमेर उत्तर से चुनाव लडने की तैयारी कर रहे हैं। अगर धर्मेन्द्र राठौड पुश्कर
से टिकट लाते हैं तो अजमेर जिले में दूसरे राजपूत नेता को कहीं से टिकट मिलने की संभावना कम होती है। राठौड की एंटी का असर पूर्व षिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ पर भी पड सकता है। कहने की जरूरत नहीं है कि पिछले चुनाव में हारने के बाद भी लगातार सक्रिय हैं और आगामी चुनाव में भी उनकी प्रबल दावेदारी रहेगी।
वैसे, रविवार को कांग्रेसियों की तादाद अपेक्षाकत अधिक थी। इस कारण चर्चाओं का बाजार भी गरम था। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूर्व षहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन ने भरपूर कोषिष की थी। उन्होंने अनेक नेताओं व पदाधिकारियों को खुद फोन किया था। कहने की जरूरत नहीं है कि आगामी दिनों में राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं, इस कारण भी संख्या में इजाफा नजर आया।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

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