
आपको पता होगा कि पिछले दिनों नए जिलों की कवायद चल रही थी। उसका स्वरूप क्या होगा, इसका किसी को पता नहीं लग रहा था। कयास जरूर लगाए जा रहे थे, मगर गर्भ में क्या हो रहा है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। हुआ यूं कि 17 मार्च 2003 को ब्यावर व केकड़ी जिला बनने के साथ ही लोगों को लगा था कि बस कुछ दिन में यहां पर जिला कलेक्टर और एसपी लग जाएंगे, तब कासलीवाल ने 6 अप्रैल को खबर लिख कर बताया कि इन दोनों स्थानों पर कलेक्टर और एसपी बैठने में कम से कम 6 महीने लगेंगे। इसी कडी में उन्होंने प्रतापगढ़ के जिला बनने का उदाहरण भी दिया था। प्रतापगढ़ जिला अस्तित्व में आया 10 मार्च को और अगस्त तक 6 माह बीत गए और उनकी खबर सच साबित हुई। 7 अगस्त को ही ब्यावर व केकड़ी जिले अस्तित्व में आए।
ब्यावर और केकड़ी दोनों जिलों में राजस्व अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण विशेषाधिकारी लगाए गए, तब ही कासलीवाल ने 17 मई को आइटम लिखा कि अधिसूचना जारी नहीं होने की वजह से जो विशेषाधिकारी लगाए हैं, वही आगे चल कर जिला कलेक्टर होंगे और यह खबर भी अक्षरषः सही साबित हुई। 7 अगस्त को इन्हे ही कलेक्टर बनाया। यह भी लिखा था कि सरकार ने इनको इसलिए लगाया ताकि यह पूरे क्षेत्र को अच्छी तरह से देख सकें, समझ सके और किस प्रकार से काम करना है, इसकी उनकी जानकारी हो सके।
कसलीवाल ने ब्यावर और केकड़ी जिले की अधिसूचना जारी होने से पहले ही 22 अप्रैल को ही बता दिया था कि ब्यावर जिला पावरफुल होगा। ब्यावर में तीन विधानसभा क्षेत्र मसूदा, जैतारण और ब्यावर शामिल होंगे। यह बात भी सही साबित हुई। इसी प्रकार यह भी बताया कि केकड़ी जिले में एक केकड़ी विधानसभा सीट शामिल होगी और 5 अगस्त को यह खबर बिल्कुल सटीक साबित हुई। इन खबरों से यह अनुमान लगाना आसान है कि कासलीवाल की प्रषासनिक तंत्र पर कितनी गहरी पैठ और पकड है।