*भाजपा राज में नगर निगम के भाजपा बोर्ड की बैंड बजा रहे हैं अधिकारी*

शहर के नालों का गंदा पानी आनासागर झील में गिरने पर एनजीटी ने लगाया 70 लाख रूपए का जुर्माना
-नगर निगम अधिकारियों ने एनजीटी में पेश किया झूठा शपथ पत्र
-सामाजिक कार्यकर्ता साहू ने बताई सच्चाई
-विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने आंखें तरेरीं, तो झील से जलकुंभी साफ हो गई
-वरना अधिकारी जलकुंभी साफ करने के नाम पर अपनी तिजोरियां भरते रहते
-जलकुंभी साफ करने में सवा छह करोड़ रूपए से ज्यादा खर्च हो गए, इतने में तो नई झील बन जाती

👉अजमेर में नगर निगम के अधिकारी भाजपा सरकार में ही भाजपा बोर्ड की बैंड बजाने में लगे हुए हैं। यह स्थिति तो तब है, जब वर्तमान में अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष हैं। यह तो गनीमत है, देवनानी ने आंखें तरेरीं और अधिकारियों को हड़काया, तो आनासागर से जलकुंभी साफ हो गई, वरना नगर निगम के अधिकारी तो जलकुंभी निकालने के नाम पर अपनी तिजोरियां भरने में मशगूल थे। जलकुंभी साफ करने के नाम पर सवा छह करोड़ रूपए से अधिक खर्च कर दिए। इतने में शायद शहर में कोई अच्छी जगह देखकर नई झील बन जाती। जिस बांडी नदी के नाले के रास्ते से जलकुंभी आनासागर तक पहुंची थी, उस नाले से भी एक-दो दिन पहले आधी-अधूरी जलकुंभी साफ की गई है, लेकिन हटाई गई जलकुंभी का मलबा अभी भी नाले में चारों तरफ पसरा हुआ है। झूठ बोलने और अदालत में झूठा शपथ पत्र देने में नगर निगम के अधिकारियों का कोई मुकाबला नहीं है। पहले एक भाजपा नेता को टारगेट कर बदतमीजी वाली भाषा में हलफनामा देने के कारण यह अधिकारी खासा चर्चा में आए थे, तो अब आनासागर में नालों से गिरने वाले गंदे पानी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में झूठा शपथ पत्र देने को लेकर चर्चित हुए हैं। आनासागर झील में 13 नालों के गिरने के मामले में गलत शपथ पत्र दायर करने को गंभीरता से लेते हुए एनजीटी की भोपाल बेंच ने नगर निगम पर करीब 70 लाख रूपए का जुर्माना ठोक दिया है। आनासागर में गंदे नालों का पानी गिरने के मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट बाबूलाल साहू ने याचिका दायर की थी, जिस पर नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी खाल बचाने के लिए झूठा शपथ पत्र पर्यावरण मामलों की सबसे बड़ी अदालत में पेश कर दिया। इसमें बताया गया था कि आनासागर झील में नालों का गंदा पानी नहीं गिरता है और सभी नालों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ दिया गया है, जबकि हकीकत इसके विपरीत है।

प्रेम आनंदकर
एनजीटी ने रोजाना 25 हजार रूपए प्रति नाले के हिसाब से यह जुर्माना लगाया है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी। यह तो हुई अदालत में झूठा शपथ पत्र दायर करने वाली बात। अब एक बानगी और देखिए। नगर निगम ने ही एक और आरटीआई एक्टिविस्ट को आरटीआई के तहत लगाए गए आवेदन के जवाब में यह भी दावा कर दिया कि एसटीपी से रोजाना 12 एमएलडी पानी साफ कर आनासागर में छोड़ा जा रहा है। अव्वल तो नगर निगम के कई अधिकारियों को यह पता नहीं होगा कि 12 एमएलडी पानी कितना होता है। यदि कुछ पल के लिए अधिकारियों की इस बात को भी मान लेते हैं कि रोजाना 12 एमएलडी पानी साफ कर आनासागर में छोड़ा जा रहा है, तो अब सवाल यह पैदा होता है कि फिर आनासागर में जलकुंभी कहां से इतनी ज्यादा पसर गई, जिसे साफ करने में नगर निगम को पसीने छूट गए और सवा छह करोड़ रूपए से ज्यादा खर्च करने पड़ गए। सवा छह करोड़ रूपए खर्च करने का आंकड़ा भी हम कोई अपनी मर्जी से नहीं बता रहे हैं, बल्कि खुद नगर निगम ने बताया है। यदि आनासागर में गंदे पानी को गिरने से रोकने और गंदे नालों को एसटीपी से जोड़ने का काम पहले ही कर दिया जाता, तो जलकुंभी पनपती ही नहीं। एसटीपी की हालत तो उस समय सामने आई थी, जब विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने इसका निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि एसटीपी पिछले पांच साल से बंद पड़ा हुआ था, जिसे अब चालू किया गया है। देवनानी ने अधिकारियों को एसटीपी की भरपूर क्षमता का उपयोग करने के निर्देश दिए, लेकिन अब भी ऐसा नहीं हो रहा है। नगर निगम का यह दावा अब भी झूठा ही नजर आता है कि झील में गंदे पानी को ट्रीटमेंट कर डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण आनासागर के किनारे बन गए होटलों, रेस्टोरेंटों, बड़े-बड़े शोरूम और बसी कॉलोनियों का गंदा पानी यानी मल-मूत्र का पानी भी इसी झील में गिरता है। इन नालों को बहुत पहले ही सीवरेज सिस्टम के माध्यम से एसटीपी से जोड़ दिया जाना चाहिए था, किंतु यह काम आज तक नहीं किया गया है। आपको बता दें, नगर निगम कार्यालय और पूरी आनासागर झील अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में ही आती है। इस क्षेत्र से लगातार पांचवीं बार जीते देवनानी आनासागर की दुर्दशा को लेकर काफी चिंतित हैं। जब विपक्ष में थे, तब भी और अब विधानसभा अध्यक्ष हैं, तब भी आनासागर की स्थिति सुधारने, इसे पूरी साफ और स्वच्छ रखने और इसका प्राकृतिक सौंदर्य बहाल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं और अब भी कर रहे हैं। यकीन मानिए, यदि देवनानी ने अपने तेवर नहीं दिखाए होते, तो शायद जलकुंभी ना जाने कितने महीनों-सालों तक जमी रहती और अधिकारी इसे साफ करने के नाम पर अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहते।
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✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
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