
सादर नमन
मैं विद्यार्थी मित्र निवेदन करना चाहता हु कि कितना हास्यास्पद और विचित्र लगता हे कि जब सरकार ये कहे कि हमने विद्यार्थी मित्रो को नही हटाया,ये खुद कोर्ट गए और कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया। मैं यहाँ पूछना चाहूँगा विद्यार्थी मित्र कोर्ट क्यों गया ?आप शायद नही जानते हो तो मैं बताता हु क्योंकि सरकार ने उसको हटा दिया था।
दूसरी हास्यास्पद बात सरकार को विद्यार्थी मित्र से सहानुभूति हे और सहानुभूति के चलते हमने इनके लिए विद्यालय सहायक भर्ती निकली जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में हे कितनी शर्मनाक बात हे सरकार एक पैरवी भी ठीक से नही कर सकी और जो मामला कुछ दिनों में सुलझ सकता था वो 10 महीनो में भी नही सुलझाया गया जानबूझ कर।
और तीसरी लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली दास्ताँ 4 महीने से लगातार सरकार का हर विधायक, हर मंत्री, हर नुमाइंदा ये कहकर विद्यार्थी मित्र को आस्वासन देता हे कि आप हर हाल में नए सत्र से स्कूल में होंगे और अपने कार्यक्रम को सफल बनाने की झुठी कोशिश करता हे। नया सत्र 1मई को शुरू हुआ लेकिन कुछ नही हुआ ,फिर आस्वासन दिया 20 जून से स्कूल में होंगे लेकिन फिर भी कुछ नही हुआ , फिर कहा गया जुलाइ के प्रथम सप्ताह में स्कूल में होंगे प्रथम सप्ताह भी गया और वही ढाक के तीन पात।अरे ओ लोकतन्त्र के मसीहाओं ! जरा सी भी गैरत रही हो तो डूब मरो चुल्लू भर पानी में.
अशोक माली, जालोर