sohanpal singh2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जिस प्रकार से एक राष्ट्रिय पार्टी के अध्यक्ष के नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों और मुस्लिमो के बीच दंगे करा कर ध्रुवीकरण की जो पटकथा लिखी गई थी अब उसकी परतें खुलने लगी हैं! क्योंकि 33 महीने के बाद भी किसानो की जो दुर्दशा हो रही है उससे सबक लेकर हिन्दू और मुस्लिम जाटों ने चौधरी अजीत सिंह के नेतृत्व में जो संकल्प लिया है की अब भविष्य में वे कभी भी एक दूसरे से नहीं लड़ेंगे बल्किन अब उस पार्टी को ही सबक सिखाएंगे ? इस हुंकार का अंब असर भी दिखने लगा है मेरठ में 3 तारीख को अध्यक्ष जी की रैली के बाद जो पद यात्रा होनी थी भारी विरोध के अंदेशे के कारण उसे रद्द कर दिया गया , नोट बंदी की विफलता के कारण विशेषकर वैश्य व्यापारी वर्ग अलग से आक्रोशित है एक प्रभावशाली वैश्य व्यापारी नेता साइकल पर सवार हो चुके हैं ? अधिवक्ता संघ भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्चतम न्यायालय की बैंच स्थापना नहीं होने के कारण भी केनद्र सरकार से नाराज है और 4 फरवरी को होने वाली साहेब की रैली का विरोध कर रहा है ?