तुष्टिकरण

त्रिवेन्द्र पाठक
अभी पिछले कुछ दिनों में जिस प्रकार के कार्य संसद में हुए वह सोचे समझे कार्यक्रम के तहत होते दिखाई दिए। सरकार और सभी दल संसद में काफी समय बाद एक मुद्दे पर एक ही राय प्रकट करते हुए नजर आए। SC ST ACT में जो परिवर्तन अभी कुछ समय पूर्व माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने किए उसके खिलाफ एक बिल संसद में पेश हुआ और सर्व सम्मति से उस बिल को केबिनेट की मंजूरी मिल गई। एक भी व्यक्ति संसद में उस बिल के विरोध में नहीं बोला जो कि चिन्तन का विषय है। मुझे अभी तक ये समझ नहीं आया कि जो ये संशोधन माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने किस आधार पर किया या बिना किसी आधार के ही किसी एक्ट में संशोधन माननीय न्यायालय कर दिया और यदि किसी आधार पर किया तो संसद में उस आधार की चर्चा क्यूं नहीं की गई।
अब प्रश्न ये है कि संसद को चलाने के लिए सभी वर्ग और पार्टीयों के राजनेता वहां उपस्थित थे जिन्होने अपनी मंजूरी इस बिल को दी। वहां सामान्य वर्ग के राजनेता भी वहां थे तो उन्होने इस बिल पर बहस क्यूं की उस आधार पर चर्चा क्यूं नहीं हुई जिसके तहत माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस एक्ट में संशोधन कर इसे लागू करने के आदेश दिए। ये उन सांसदों के प्रति चिन्तन का विषय है जिन्हे सामान्य वर्ग ने अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद भेजा था।
बहरहाल अब इस संसदीय कार्यावाही के प्रति सामान्य वर्ग में रोष है। और इसका लाभ वही राजनेता लेने का प्रयास कर रहे हैं जो संसद में मौन थे कोई भी सामने नहीं आना चाहता बस अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी सहानूभूति सामान्य वर्ग की जनता से लेना चाहते हैं क्योंकि वर्ष चुनावी है। लेकिन अब जनता को वास्तव में जागरूक होने की जरूरत है। सरकार हर वर्ग के आगे घुटने टेक रही है चाहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रकरण में ममता बनर्जी द्वारा दी हुई गृहयुद्ध की धमकी हो, या कश्मीर में पूर्व मुख्यमंत्री(भाजपा समर्थित) का धारा 370 और 35ए पर दिया गया देश विरोधी ब्यान हो या फिर दलित समुदाय द्वारा दी गई 9 अगस्त को देशव्यापी आन्दोलन की धमकी हो। हर जगह सरकार नाकाम साबित हुई और विपक्ष भी इन मुद्दों पर पूरी तरह से दबाव बनाता रहा और देश विरोधी कार्यावाही में संलग्न रहा। अतः अब जो भी निर्णय लेना है जनता को स्वयं लेना है। किसी भी दल पर इसके बाद विश्वास करना देश के साथ विश्वासघात ही कहलाएगा। इसलिए जागिये और सोचिये आप क्या कर रहे हैं। चिन्तन और मनन करें। और अपने अपने कमेन्ट करें कि आपके क्या विचार हैं।
जय हिन्द
त्रिवेन्द्र कुमार “पाठक”
Trivendra Kumar Pathak
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