झूठ परोस कर भ्रम फैलाने की नाकाम कोशिश

दिल्ली में बैठा नेशनल मीडिया राजस्थान चुनावों को लेकर गोदी मीडिया की भूमिका में आ गया है। प्रचार खत्म होने से पहले मीडिया द्वारा झूठ परोस कर भ्रम फैलाने की नाकाम कोशिश हो रही है। ये मीडिया मालिक भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के दबाव में झूठ परोस रहे हैं। देश में ऐसा माहौल और सरकार का मीडिया पर दबाव देखकर ईमानदार पत्रकारों की आत्मा जरूर कचोट रही है। मालिकों के दबाव के आगे पत्रकारों की दुविधा और मजबूरी समझी जा सकती है। राजस्थान में पिछले तीन दिनों से भाजपा और संघ वाले ओपिनियन मेकर मीडिया के जरिए ये भ्रम फैलाने में जुटे हुए हैं कि राजस्थान में फिर से वसुंधरा सरकार बनने जा रही है। मैं पिछले छह महीने में प्रदेश के 150 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में 9 हजार किलोमीटर की यात्रा कर हजारों तरह के लोगों से मिला हूं। मैंने ग्राउंड रियलिटी को नजदीक से देखने और समझने की कोशिश की है। सबसे लगातार संपर्क में हूं। स्थानीय मीडिया के साथियों से लगातार संपर्क में हूं। प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के हर घटनाक्रम पर बारिकी से नजर रखने की कोशिश करता रहता हूं। दिल्ली में भाजपा और कांग्रेस की चुनावों को लेकर बनने वाली रणनीति को भी देख और समझ रहा हूं। इस सबके आधार पर और 15 साल के पत्रकारिता के अनुभव के आधार पर कुछ बातें साझा कर रहा हूं और लोगों को सही तथ्यों से अवगत करा रहा हूं।

1., राजस्थान में स्पष्ट बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। टिकट वितरण को लेकर मीडिया भ्रम फैला रहा है कि कांग्रेस को नुकसान हुआ है। प्रदेश की जनता में वसुंधरा राजे जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ऐसे में वो भाजपा को हर हाल में हराकर कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए मन बना चुकी है।

2. भ्रम फैलाया जा रहा है कि अशोक गहलोत जी और सचिन पायलट जी सीएम बनने के लिए एक दूसरे के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचांएगे। ये भाजपा का कुप्रचार है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। अशोक गहलोत जी उन सभी सीटों पर चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं, जो पायलट साहब या सीपी जोशी जी के करीबी रहे हैं। वहां खुलें मन से कांग्रेस को जिताने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। ऐसा ही सचिन पायलट जी भी कर रहे हैं। दोनों कह चुके हैं कि हम सब राहुल गांधी जी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के लोग हैं। उदाहरण के लिए मेरे जालोर में सचिन पायलट जी के करीबी नेताओं को टिकट मिला है, लेकिन वहां अशोक गहलोत साहब सभा लेने गए हैं। उनके जाने से माहौल पूरी तरह बदला है। आपस में गुटबाजी जैसी कोई बात ग्राउंड पर नजर नहीं आ रही है।

3. प्रदेश में कांग्रेस का भारी अंडर करंट है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां जहां कांग्रेस के बागी भी खड़े हो रखें है, वहां भी चुनावी मुकाबला कांग्रेस और कांग्रेस के बागी के बीच में है। भाजपा का एक भी बागी नेता आपको जीतने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। जबकि कांग्रेस के बागी भी कई जगह भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के बागियों को आप ग्राउंड पर देखेंगे तो आपको राजस्थान की चुनावी हवा और अंडरकरंट समझ में आ जाएगा।

4. राजस्थान में कांग्रेस के नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई विवाद नहीं है। जो कांग्रेस को नजदीक से जानते हैं वो समझ रहे हैं कि क्या होने वाला है। ये भाजपा नहीं है, जहां वसुंधरा राजे जी कटारिया जी के यात्रा निकालने पर विरोध में भाजपा को तोड़कर नई पार्टी बनाने की धमकी दे या नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए दिल्ली में राजनाथसिंह जी के सामने विधायकों की परेड करवाएं या मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करवाने के लिए प्रभारी कप्तान सिंह जी सोलंकी को धमका कर भाजपा संगठन की मर्जी के खिलाफ धौलपुर के राजमहल में पूरी प्रदेश भाजपा की मार्च पास्ट करवा कर नाक रगड़ने के लिए मजबूर कर दें या मोदी जी और अमित शाह जी की लाख कोशिशों के बावजूद गजेन्द्र सिंह जी शेखावत को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नहीं बनने दें।

5. राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री अशोक गहलोत जी और सचिन पायलट जी, गिरिजा व्यास जी, सीपी जोशी जी, मानवेन्द्र सिंह जी आदि तमाम नेता भारी मतों से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा में वसुंधरा राजे जी समेत अधिकांश वरिष्ठ नेता चुनाव हार रहे हैं। मीडिया वाले ये नहीं बताएंगे।

6. दिल्ली में मीडिया की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है कि भाजपा की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है और मोदी जी की सभाओं के बाद फिर से वसुंधरा राजे की सरकार बनने जा रही है। ऐसा बिल्कुल ही नहीं है। मोदी जी और अमित शाह जी को भी यहां स्थानीय भाजपा नेताओं की ओर से स्पष्ट बता दिया गया है कि बहुमत से कांग्रेस की सरकार बन रही है।

7. दिल्ली का मीडिया गहलोत और पायलट के मतभेदों पर बात कर रहा है, जबकि इस बारे में चुप्पी साधे हुआ है कि प्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता ओम प्रकाश माथुर साहब का उनके खुद के पाली जिले में कोई उपयोग क्यों नहीं लिया गया। क्यों *माथुर साहब* की अलग से पश्चिमी राजस्थान में एक भी चुनावी सभा वसुंधरा राजे जी ने होने नहीं दी ? इसका मीडिया वाले ज़वाब नहीं मांगेंगे। सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटाएगा ?

– *अर्जुन मेघवाल* जी का पूरे प्रदेश में खासतौर पर एससी समुदाय पर अच्छा प्रभाव है। वो केंद्रीय मंत्री भी हैं। वसुंधरा राजे जी ने मेघवाल साहब की एससी वर्ग के लिए कोई सभा नहीं होने दी। बहुत ही जगहों से मेघवाल साहब की सभा के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने डिमांड भी की, लेकिन वसुंधरा जी ने इजाजत ही नहीं दी।

– *राज्यवर्धन सिंह जी राठौड़* और *गजेंद्र सिंह जी शेखावत* देश में भाजपा के यूथ आइकन और राजपूत लीडर के तौर पर माने जाते हैं। आपने प्रदेश में इन दोनों नेताओं की एक भी सभा किसी भाजपा प्रत्याशी विशेष के पक्ष में देखी ? केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को जयपुर ग्रामीण के बाहर ही नहीं निकलने दिया। जोधपुर के बड़े नेता होने का दावा करने वाले गजेन्द्र सिंह जी शेखावत साहब ने तो खुद की लोकसभा सीट जोधपुर से चुनाव लड रहे भाजपा के राजपूत प्रत्याशी शेरगढ़ के बाबू सिंह जी राठौड़, लोहावट से भाजपा के प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह जी खींवसर, पोकरण से भाजपा प्रत्याशी प्रतापपुरी जी आदि के लिए सांसद गजेन्द्र सिंह जी शेखावत ने वोट मांगने के लिए फील्ड एक बार भी मन से में नहीं गए। सिर्फ मोदी जी की सभा में जोधपुर आने का न्यौता देने के लिए गए थे।
शेखावत साहब की मनोदशा और भाजपा में उनकी स्थिति को समझा जा सकता है। इतना ही नहीं जोधपुर की सबसे हाॅट सीट सरदारपुरा है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी चुनाव लड रहे हैं। वसुंधरा राजे जी के नज़दीकी और बार्डर बेचने को लेकर विवादों में आए दागी शंभू सिंह जी खेतासर ने तो वसुंधरा राजे जी के दबाव चलते जोधपुर के भाजपा सांसद गजेन्द्र सिंह जी शेखावत को अशोक गहलोत जी के खिलाफ चुनाव प्रचार के लिए बुलाना तक उचित नहीं समझा। मैं पिछले 15 दिन से जोधपुर हूं। सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह जी ने आज दिन तक मोदी जी के साथ मंच शेयर करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस की औपचारिकता के अलावा जोधपुर में फील्ड में जाकर एक भी सभा नहीं ले पाए हैं। वसुंधरा राजे जी के पार्टी पर इस एकाधिकार पर आपको कोई भी मीडिया चैनल और अखबार ख़बर नहीं दिखाएगा।
ये तो मैंने भाजपा के चंद नेताओं के उदाहरण दिए हैं, आप अपने अपने इलाके में देखना वसुंधरा राजे की चाटुकारिता नहीं करने वाले एक भी भाजपा नेता को कहीं चुनाव प्रचार करने दिया हो तो मुझे जरूर बताना ??
*आप मुझे ये समझाओं वसुंधरा राजे जी से इस तरह अपमानित होने वाले ओम माथुर साहब, गजेन्द्र सिंह जी शेखावत, राज्यवर्धन सिंह जी राठौड़, अर्जुन मेघवाल जी, भूपेंद्र यादव जी आदि भाजपा को जिताकर वसुंधरा राजे जी को दुबारा मुख्यमंत्री बनते हुए देखना चाहेंगे ??*
इनके लिए अस्तित्व की लड़ाई है। वसुंधरा राजे जी की विदाई में ही प्रदेश में नई भाजपा का उद्भव संभव है, ये बात सारे युवा और बड़े नेता बखूबी जानते हैं।

8. दिल्ली का मीडिया इस पर बात नहीं कर रहा है कि भाजपा की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी झालरापाटन विधानसभा सीट से मानवेन्द्र सिंह जी के सामने खुद चुनाव हार रही है। वहां राजपूत, मुस्लिम और गुर्जर समाज और वसुंधरा राजे जी से पीड़ित रहे पूर्व केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त *एस एन गुप्ता जी* समेत तमाम लोग मानवेन्द्र सिंह जी को जिताने के लिए एक जाजम पर है। दिग्विजय सिंह जी वहां गांव गांव घूमकर वसुंधरा जी की नींव खोद रहे हैं, लेकिन वसुंधरा जी की हार पर मीडिया मौन है। सबसे ताज्जुब की बात ये है कि वसुंधरा राजे जी को चुनाव हराने के लिए भाजपा और आरएसएस के तमाम लीडर आगे होकर न केवल मानवेन्द्र सिंह जी को रणनीतिक मदद कर रहे हैं, बल्कि आर्थिक मदद भी कर रहे हैं।

9. अगर प्रदेश में किसकी सरकार बन रही है, ये समझने के लिए आपको किसी टीवी चैनल को नहीं वरन्, प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को आप देखो। पिछले 15 दिन से वसुंधरा राजे जी के प्रमुख सचिव श्री तन्मय कुमार जी के अफसरों ने फोन उठाने तक बंद कर दिए हैं। प्रदेश के सारे आला अफसरों को अशोक गहलोत जी और सचिन पायलट जी को गोपनीय रिपोर्ट भेजते हुए देखा जा सकता है। ब्यूरोक्रेसी सदैव आती हुई सरकार को नमस्कार करती है, जाती हुई को नहीं। आप में से कोई भी राज्य के आला अफसर से इस बारे में बात करके तस्दीक कर सकते हैं।

10 . प्रदेश की स्टेट इंटेलिजेंस और सेंटर इंटेलिजेंस ने एक दिन पहले जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कांग्रेस के स्पष्ट बहुमत से सरकार बन रही है। अमित शाह जी को तीन दिन पहले भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री ने भी कांग्रेस की सरकार बनने का बताया था।

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श्रवण सिंह जी राठौड़

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