इस बार न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन समय परिवर्तित क्यों नहीं किया गया

आदरणीय अधिवक्ता साथियों प्रतिवर्ष राजस्थान उच्च न्यायालय तथा राजस्थान के अधीनस्थ न्यायालय सहित देश के विभिन्न राज्यों में प्रतिवर्ष अप्रेल माह के द्वितीय शनिवार के बाद आने वाले सोमवार से न्यायालयों का समय 7.30 बजे से 1 बजे तक का हो जाता है।तथा ये व्यवस्थाएं 30 जून तक रहती है।इन व्यवस्थाओं के पीछे मुख्य कारण क्या है?ये व्यवस्थाएं कब से चली आ रही है?इस बारे में राजस्थान हाईकोर्ट सहित अन्य न्यायालयों में कोई रिकॉर्ड तो उपलब्ध नहीं है।लेकिन ग्रीष्मकालीन समय परिवर्तन का लॉजिक समझ में आता है।जहां तक मेरा मानना है।अंग्रेजों के बनाए हुए कानून और उन्ही के द्वारा बनाई हुई व्यवस्थाओं में वो ही लोग तात्कालीन समय में जज होते थे।ठंडे प्रदेश में रहने वाले ठंडे और गोरे लोग अपने दिमाग और शरीर को ठंडा रखना चाहते थे।इसलिए ही वो ठंडक में अपना काम करना चाहते थे और वैसा देखा जाए तो ये ठीक भी था।जज साहब जितने शांत और ठंडे माहौल में रहेगें उतनी ही सुगमता से न्याय प्रणाली को संचालित कर सकेगें।हांलाकि वर्तमान परिस्थितियों में कई बार इस व्यवस्था का विरोध भी हुआ लेकिन वकीलों की एकरूपता नहीं होने की वजह से ये व्यवस्था लगातार चली ही आ रही है।इस वर्ष का हाईकोर्ट द्वारा जो कलेण्डर जारी किया गया है उसमें भी 12 अप्रेल से 30 जून तक का समय परिवर्तित होना दर्शाया गया है।लेकिन अचानक हुए लॉक डाउन की वजह से यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।इसलिए मेरा माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय से यही सुझाव है कि ये व्यवस्था पुनः चालू की जाए।जिससे पूरी न्याय व्यवस्था हमेशा की तरह गर्मी के माहौल में ठंडी रह सके।जहां तक लॉक डाउन की वजह से अति आवश्यक प्रकृति के मामलों की सुनवाई की बात है।इस हेतु 10.30 से 12.30 बजे का समय उपयुक्त रहेगा।लॉक डाउन के चलते सुबह सुबह 2-3 घंटे के लिए मार्केट खुलता ही है उसी दौरान आवश्यक प्रकृति के मामलों की भी सुनवाई हो जाएगी तो इस सिस्टम में शामिल होने वाले लोगों को भी डब्बल बार घर से नहीं निकलना पड़ेगा और वो वर्तमान हालातों के हिसाब से उपयुक्त भी होगा।
*निवेदक-डॉ.मनोज आहूजा एडवोकेट एवं पत्रकार* 9413300227

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