कल तक जो कर्मी सिविल पुलिस में थे उनका ACD में पद स्थापन होते ही क्या पूरी तरह ह्रदय परिवर्तन हो जाता है

सत्य किशोर सक्सेना
सत्य किशोर सक्सेना
भ्रष्टाचार निरोधक विभाग,राजस्थान पुलिस,सरकार ,कार्य प्रणाली व परिणाम विषय आज राज्य में जोधपुर के पुलिस एसीपी(ACP)के 70,000रू की रिश्वत के प्रकरण में गिरफ़्तारी के बाद काफ़ी चर्चित रहा जिस पर अजमेर के वरिष्ठ पत्रकार एस पी मितल जी ने बड़ा ही सामयिक व प्रभावकारी ब्लाग लिखा है एंव डा.अशोक मितल जी ने भी अभिव्यक्ति के माध्यम से वर्तमान पुलिस व अन्य क्षेत्रौ में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अफ़सोस व्यक्त किया है एंव घटना ने हर राज्य वासी को प्रश्न करने व चिन्तन करने को उत्प्रेरित किया है, उस क्रम में ही मेरे द्वारा यह अभिव्यक्ति की जा रही है। वर्तमान में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग राजस्थान पुलिस का ही एक विभाग है तथा विभाग के अधिकारी ,एस आई,ए एस आई, या पुलिस कर्मी सिविल पुलिस या ACD विभाग में स्थानान्तरित या पद स्थापित किये जा सकते हैं।प्रश्न उठता है कि कल तक जो कर्मी सिविल पुलिस में कार्यरत है वह ACD विभाग में पद स्थापित होते ही क्या पूरी तरह ह्रदय परिवर्तन हो जाता है तथा उसका व्यवहार /आचरण पूरी तरह भ्रष्टाचार विरोधी हो जाता है । मेरी विनम्र राय में एेसा आमूलचूल ह्रदय व मानसिक परिवर्तन आज के भौतिकवादी युग में क़तई संभव नही है। राज्य सरकार को ACD विंग को प्रभावकारी बनाने के लिये क़दम उठाना चाहिये अर्थात ACD विभाग को पूर्ण रूप से अलग विभाग बनाना चाहिये जिसके अधिकारी व कर्मी नियुक्ति स्तर से अलग हो तथा उसका सिविल पुलिस से प्रत्यक्ष तौर कोई संबंध न हो । पारस्परिक inter transferable न हो।ACD विभाग के लिये चुनौती भ्रष्टाचार के न्यायालय मे सुनवाई के दौरान गवाहों का बयान से पलट जाना या hostile हो जाना है क्यों कि आज जोधपुर की घटना के बाद जन सामान्य में चर्चा रही कि आगे गवाह बयानों से मुकर जायेगें और अपराधी पुलिसवाले बरी हो जायेगें जैसा कि अजमेर ACD कोर्ट में विचाराधीन पुलिस रिश्वत बंधी मुक़दमों में हुआ जिस में प्रायः सभी पुलिस कर्मी गवाह स्वयं के बयानों से मुकर गये है अर्थात यदि गवाहों द्वारा न्यायालय मे सत्य बयान दिये हैं तो क्या ACD के अनुसंधान करने वाले अधिकारी ने उनके झूठे बयान लिखे और प्रारंभ से ही ऐसे गवाह बनाये गये कि बाद मे अदालत से अपराधी बरी हो जायें । यदि ऐसा नही तो अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार किये बिना ही बयानों से मुकरने वाले पुलिस गवाहों के विरूद्ध विभागीय अनुशासनातमक कार्यवाही प्रारम्भ कर, चार्ज शीट दी जाकर विभागीय जॉच जल्द से जल्द पुरी कर सेवा से बर्ख़ास्तगी का दंड दिया जाना चाहिये तब ही अन्य ACD के प्रकरणों मे गवाह बयानों से मुकरने से रोका जा सकेगा क्यों कि हर भ्रष्टाचार के केसो मे ACD विभाग सरकारी विभाग के अधिकारियों को ही गवाह बनाता है यद्यपि अदालत भी बयानों से मुकरने वाले (hostile) गवाह के विरूद्ध मुक़दमे का अन्तिम /फ़ाइनल फ़ैसला करते समय मुकदमा चलाये जानें या अनुशासनातमक कार्यवाही करने के आदेश पारित कर सकती है परन्तु एेसा प्रायः बहुत कम होता है क्यों कि वर्तमान में कोई भी अदालत स्वयं का काम नहीं बढ़ाना चाहता है।अन्तोगतवा यदि वर्तमान घटनाक्रम व व्याप्त प्रक्रिया पर गहन चिन्तन व गंभीर कार्यवाही कर गवाह मुकरने को न रोका गया तो राज्य व सरकार को भ्रष्टाचार मुक्त नही बनाया जा सकेगा। आशा है सरकार इस मुद्दे पर चिंतन कर प्रभावकारी क़दम उठायेगी।

सत्य किशोर सक्सेना , एडवोकेट , पूर्व ज़िला प्रमुख , अजमेर(राज)9414003192

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