ज्योति मिर्धा का कितना स्वागत करेगा नागौर!

नागौर के राजनीति में हमेशा एक  राजनीतिक समूह स्थापित राजनीतिक सिद्धांतों के प्रतिकूल रहा है।  नाथूराम जी मिर्धा ने अपने राजनीतिक अवधि के जादातर वक़्त कांग्रेस के विरोध में निकाला। श्री रिच्पल मिर्धा कई बार कांग्रेस से अंदर-बाहर हो चुके है। श्री रिच्पल मिर्धा ने कई चुनाव कांग्रेस के खिलाफ लड़े है जैसे की जिला परिषद, विधान सभा और संसद के सदस्य।  यहा तक की 1998 में जब राजस्थान का पूरा कृषि-भूमि समुदाय एक होकर कांग्रेस से मुख्य मंत्री बनवाने की उम्मीद में था तब भी रिच्पल मिर्धा कांग्रेस छोड भाजपा से चले गए थे।  राम गोपाल मिर्धा, नाथूराम मिर्धा के सहयोगी और रिश्तेदार श्री प्रभु राम मिर्धा के पोते पहले से ही भाजपा में है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है की नागौर से ज्योति मिर्धा को संसद की सीट के लिए नामांकन मिलने से पहले उनका कांग्रेस का हिस्से (कांग्रेस सदस्य) होने का या नागौर के लोगों के साथ काम करने का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। यह इसलिए तार्किक है कि वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं, कांग्रेस संस्कृति, कांग्रेस के सिद्धांतों के बारे में नहीं जानती है. पंचायत चुनाव में उसकी भूमिका, उनके राजनीतिक समूह के जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में भूमिका, कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों और मौजूदा विधायक के साथ संबंध है, संगठन में उसकी भूमिका उदासीन और नागौर जिले में व्यवहार नकारात्मक रहा है।
पंचायत चुनाव में उसकी भूमिका ने गुटबाजी को बढ़ावा दिया, नागौर के वरिष्ठ पत्रकार विजय महर्षि ने इंडिया टुडे के फ़रवरी 2010 के अंक में विस्तार से लिखा है। उसे राजनीतिक समूह का आंतरिक कांग्रेस पार्टी चुनाव के समय पर श्रीमती नीलिमा सुखाडिया की यात्रा के दोरान जिला कांग्रेस कमेटी में अराजकता पैदा करने की भूमिका और ऊर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह के कार्यक्रम में स्थानीय वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी श्री हेमा राम को जान से मरने की धमकी और हाथापाई की खबरे सभी स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों में छपी है। उसके वर्तमान विधायको के साथ कड़वे संबंध गोपनीयता की बात नहीं है, संगठन और मुख्यमंत्री पूरी तरह से वाकिफ हैं।  नागौर के लोगों, नागौर के लोगों को भूल जाते हैं, वहाँ उनके साथ कोई रिश्ता कभी जुड़ा ही नहीं था। इन प्रचलित हालत में नागौर के लोगों, पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और विधायक का उनकी नागौर यात्रा के समय पर आने की उम्मीद करना अकल्पनीय होगा।

-मेघराज चौधरी 
शिक्षक और अंशकालिक पत्रकार

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