इंसाफ की मौत

बी एल सामरा “नीलम “
जब अलविदा हो विश्व से ,
इंसाफ जन्नत को गए ।
हर मकलूक की इमदाद करने , उसके तीन बेटे रह गए ।।
सबसे बड़े रिश्वत अली और मंझले खुशामद बेग ,
छोटे सिफारिश खान है ।
हर बसर की कामयाबी ,
अब इन्हीं के हाथ है ।
हर मुश्किल आसान कर दे ,
जिनके सर पर उनका हाथ है । कत्ल के जुर्म में भी ,
रिश्वत अली की जीत है ।।
सख्त हाकिम मोम होकर ,
और गाता उसी के गीत है ।
गर नौकरी मिलना है मुश्किल , जा मिल सिफारिश खान से ,
मुन्ना खुशामद बेग को ,
गोद में ले पुचकार कर ।
और जी हजूरी सीख ले ,
फिर चाहे जो व्यापार कर ।।

*बी एल सामरा नीलम*
पूर्व शाखा प्रबंधक
भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय अजमेर

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