हर कोई घर जाना चाहता है, सरकार इसके लिये आसान तरीका अपनाए

गोपालसिंह लबाना
लाॅकडाउन करना मानवता के लिये अतिआवश्यक था सो हो चुका। अचानक हुऐ लाॅकडाउन से जो जहां था वहां ठहर गया, इस भरोसे की 21 दिन बाद 14 अप्रैल को घर जाने का रास्ता खुल जायेगा। लेकिन 3 मई तक के दूसरे चरण के लाॅकडाउन ने अपने घर से दूर फंसे लोगों की बेचैनी बढ़ा दी, वे अपने गांव, अपने घर, अपने परिवार के पास जाने के लिये मजबूर , बैचैन, परेशान है। ऐसे दूर दराज फंसे लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के साथ सोशलडिस्टेन्स का ध्यान रखते हुऐ, कम सवारियों की संख्या दृष्टि से तीन-चार गुना ज्यादा किराया लेकर रेल अथवा बसें चलानी चाहिये। ऐसा नहीं है कि लाॅकडाउन में फंसे सभी लोग गरीब और दिहाडी मजदूर ही हैं । बहूत से सम्पन्न भी हैं जो अधिक व्यय भार सह सकते हैं। ऐसी व्यवस्था से देश-परदेश, घर से बाहर फंसे लोगों को राहत मिलेगी और 3 मई बाद यदि लाॅकडाउन बढाया भी गया तो लोग परेशान भी नहीं होंगे। केन्द्र व राज्य सरकारों को इस प्रकार के यातायात आरम्भ करने पर विचार करना चाहिए।
✍ जी. एस. लबाना
अजमेर।

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