रामायण के सितारें फिर साथ

शिव शंकर गोयल
करीब 32 साल पहले प्रसारित रामायण सीरियल के सुनहरे दिन दर्शक अभी भूले नही है. सुप्रसिध्द फिल्मकार स्व रामानंद सागर के इस सीरियल ने टीवी जगत में क्रांति ला दी थी. यहां तक कि राम और सीता की भूमिका करने वाले अरूण गोविल और दीपिका चिकलिया को तो बहुत से दर्शक भगवान के रूप में ही देखने-मानने लगे थे.
जनवरी 2020 में स्व रामानंद सागर के पुत्र श्री प्रेम सागर ने एक पुस्तिका “An Epic life-Ramanand Sagar.” प्रकाशित करवाई और सीरियल के वर्तमान में जीवित सभी कलाकारों को मुंबई में एक समारोह में आमंत्रित किया.
इन पात्रों में राम (अरूण गोविल), सीता (दीपिका चिकलिया), लक्षमण (सुनील लहरी), शत्रुघ्न (समीर रायजादा), मांडवी (सुलक्षणा खत्री) वहां आए. साथ ही हनुमान (स्व. दारा सिंह) के पुत्र बिन्दू दारा सिंह, भरत ( स्व.संजय जोग) की पत्नि भी वहां पहुंची.
समय समय पर यह कलाकार रामायण की शूटिंग के दौरान घटी कुछ रोचक घटनाएं लोगों से शेयर करते रहते है. मसलन सुनील लहरी ने बताया कि वनवास की शूटींग के दौरान एक छोटा सांप रेंगता 2 उनकी तरफ आगया जिसे मौके पर ही देखकर वहां से हटाया. श्री लहरी ने ही बताया कि शूटिंग के दौरान मौकें पर शबरी द्वारा दिये गए मीठे बेर नही मिले तो किसी तरह बेर का इंतजाम किया गया लेकिन वह खट्टे थे. वही बेर खाकर राम-लक्षमण को पॉजिटिव एक्सप्रेसन देना था. लहरी ने बताया कि अरूण गोविल को इसमें काफी दिक्कत आई. उन्होंने यह भी बताया कि एक बार सुग्रीवका किरदार करने वाले श्यामसुंदर को सेट पर काल्पनिक घंघरू की आवाजें सुनाई देने लगी थी.
लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब इन पात्रों में से कुछ ने देश की धर्मपरायण जनता की भावनाओं का दोहन करना शुरू कर दिया. मसलन राम बनने वाले पात्र ने कांग्रेस का तो सीता और रावण पात्रों ने बीजेपी का पल्ला पकड लिया और वह दोनों बीजेपी के सांसद बनकर संसद में साथ 2 बैठने लगे. कहते है कि उन दिनों कतिपय क्षेत्रों में यह मजाक चल निकला था कि जब सीता और रावण एक तरफ होगए है तो काहे का युध्द और काहे की रामलीला ? मजे की बात यह हुई कि फिर हनुमान भी बीजेपी में चले गए.
देश के दोनों ही प्रमुख दलों को चाहिए था कि वह लोगों की धार्मिक श्रध्दा का दोहन नही करती.

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