
याद रक्खे कि आशाओं का जीवन काल अंनत होता है वहीं दूसरी तरफ निराशा और असफलता का जीवनकाल अल्प एवं छोटा होता है ,निराशा और असफलताओं के निराशाजनक वातावरण में आशा का दीपक जलायें रखें और घनघोर अंधकार मे भी प्रकाश की किरणें की खोज करें |
2.खुशी आदमी के भीतर ही होती है तथा रिलैक्स मन ही प्रगति और खुशहाली का प्रवेश द्वार है| वास्तव में सभी इन्सान और अन्य प्राणी अविनाशी पवित्र और शांती प्रिय आत्मायें हैं और परमपिता परमात्मा की संतान है , उनका कोइ रगं नहीं ना ही कोइ धर्म ना ही कोई लिंग है धर्म का चेहरा तो उनको समाज ने दिया है| | आपस में वैमनस्य फेलाने का काम तो तथाकथित धर्म के ठेकेदार और राजनेता ही करते हैं| बापूजी के भजन ईश्वर अल्लाह एक ही नाम, सबको सन्मति दें भगवान” का अक्षरस पालन करें
डा. जे. के. गर्ग