स्वनिर्णय

Dinesh Garg
हममें से अधिकांश जिदंगी में ज्यादा वक्त यह सोचने में बर्बाद कर देते हैं कि हम जिंदगी में क्या नहीं कर पाए? जबकि हमें यह सोचना चाहिए कि भविष्य में हम अब क्या कर सकते हैं। अतीत की धारा में बने रहने का कोई लाभ भी तो नहीं है। हर रात्रि के बाद जब सूर्योदय होना निश्चित है तो हमेशा जो नहीं कर पाएं उस पर चिंतन ना करे। इसके स्थान पर भविष्य की नीति अपने बीते अनुभवो से सीख लेकर बना लेनी चाहिए। जीवन में सफल होने वालो का इतिहास पढ़े तो यह ज्ञात होगा कि उन्होंने अपनी जिदंगी को अपने ढंग से जीने का प्रयास किया। एक हमारी सभी की कमी यह भी है कि हम दूसरों की जिंदगी पर ज्यादा ध्यान देते हैं और इसका कारण होता है कि हमारी भीतर की शांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। हम दूसरों को समझाने का यह प्रयास करते हैं कि जिदंगी ऐसी जीनी चाहिए लेकिन खुद समझने का प्रयास नहीं करते कि जिंदगी को कैसे जीना चाहिए। हमें जीवन में वही करना चाहिए जिस पर हमें पूर्ण विश्वास हो। इस दुनिया में हर व्यक्ति हर वह काम कर सकता है जो उसे उसने मन के मुताबिक करने की सोच लिया हो। यह सत्य है कि हमें संतुष्टि भी उन्हीं कार्यो से प्राप्त होगी जिसकी चाहत हमें है। टिमटिमाते तारो में अपने को शामिल करने के लिए आपको स्वयं को प्रकाशित होने का हुनर भी आना चाहिए। जीवन में यह बात हमेशा याद रखे कि उम्मीद हमेशा स्वयं से रखे। विश्वास श्रद्धा परमशक्ति पर रखे और जीत ले जीवन की प्रत्येक जंग को।

DINESH K.GARG 9414004630
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