कोलकाता, 31 जुलाई। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) की पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने राज्य में चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के मसौदा नियमों को लेकर श्रमिक संगठनों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। संगठन की ओर से राज्य सचिव अशोक दास ने इस संबंध में राज्य के श्रम आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।
ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा चारों श्रम संहिताओं के अंतिम नियम अधिसूचित किए जाने के बावजूद पश्चिम बंगाल में अभी तक संबंधित नियम निर्धारित नहीं होने के कारण राज्य में श्रम संहिताएं लागू नहीं हो सकी हैं। नई सरकार के गठन के बाद राज्य सरकार ने श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में 13 जुलाई को राज्य श्रम विभाग की वेबसाइट पर चारों श्रम संहिताओं के मसौदा नियम प्रकाशित कर 45 दिनों के भीतर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं।
एआईयूटीयूसी का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण विषय की जानकारी राज्य के मान्यता प्राप्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों को आधिकारिक रूप से नहीं दी गई। इतना ही नहीं, इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया, जिसके कारण श्रम विभाग के अनेक कर्मचारी भी मसौदा नियमों से अनभिज्ञ हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए एआईयूटीयूसी के राज्य सचिव अशोक दास ने राज्य श्रम आयुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपा तथा विशेष श्रम आयुक्त आशीष सरकार से मुलाकात कर संगठन की मांगों से अवगत कराया।
ज्ञापन में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
चारों श्रम संहिताओं के मसौदा नियमों की प्रतियां सभी मान्यता प्राप्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों को उपलब्ध कराई जाएं।
मसौदा नियमों के संबंध में समाचार माध्यमों के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि सभी हितधारकों को इसकी जानकारी मिल सके।
सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन की जाए, जिससे सभी संबंधित पक्ष पर्याप्त समय लेकर अपनी राय प्रस्तुत कर सकें।
एआईयूटीयूसी ने आशा व्यक्त की है कि राज्य सरकार और श्रम विभाग उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेंगे तथा श्रमिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।