
एक कारण है ज्यादा सोच। हममे से अधिकांश किसी कार्य को करने से पहले, कार्य के दौरान, कार्य के परिणाम के बारे में अत्यधिक चिंतन करते रहते है। आसपास के माहौल को देखते है कि दूसरा ऐसा कर रहा है या नहीं। मैं असफल तो नहीं हो जाऊंगा और कारण होता है कि सही समय निकल जाता है और वह कार्य ही प्रारंभ नहीं हो पाता अत: ज्यादा सोच के स्थान पर त्वरित निर्णय लेकर कार्य प्रारंभ करे। कार्य करेगें तभी समस्यायें सामने आएगी और उनका समाधान भी निकलेगा।
एक कारण हम सभी अतीत में जीते है। भूत में क्या हुआ, उसने मेरे साथ ऐसा क्या किया था की सोच चलती रहती है जबकि अतीत तो बीत चुका होता है। आवश्यक नहीं कि वह भविष्य में भी वैसे ही आए हां इतना अवश्य है कि गुजरे अतीत की गलतियों से सबक लिया जा सकता है।
एक कारण है कि हम हमेशा अपनी खुशी के स्थान पर दूसरो को खुश रखने का प्रयास करते है। मेरा मित्र क्या कहेगा, प्रियजन क्या सोचेेगे और इसी सोच के चलते हम हमारे निर्णयों को गलत दिशा में मोड़ लेेते है। जीवन में यह सत्य मानकर चलो कि आप सभी को एक समय में खुशी प्रदान नहीं कर सकते। आपने खुशी हासिल की यह ही पर्याप्त है, हां अवश्य स्मरण रखे कि दूसरो की खुशी को छीनकर ऐसा ना हो।
मेरा मानना है कि स्वयं का आत्मविश्वास ही सफलता असफलता तय करता है। यदि आप यह मान ले कि हममे दुनिया बदलने की शक्ति है तो आप निश्चित वह कर पाएंगे। सफल हुए अधिकांश व्यक्ति हमारे जैसे परिवेश के थे लेकिन कुछ अलग करने की ठान ली और कर दिखाया तो मैं भी ऐसा कर दिखाऊंगा का विश्वास ही आपको औरो से अलग बना देगा। आपकी सकारात्मक सोच, वर्तमान में आत्मविश्वास के साथ खुशी के पलो के साथ जीना आपको कभी भी उम्र दराज नहीं करेगा। अब निर्णय आपको करना है कि आप क्या बनना चाहते है। ताउम्र जवान या फिर उम्र के पूर्व चिंताग्रस्त।
DINESH K.GARG ( POSITIVITY ENVOYER)
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