
एक बार यूनान के मशहूर दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक नगर में गये। वहां उनकी मुलाकात एक वृद्ध सज्जन से हुई। दोनों आपस में काफी घुल मिल गये। वृद्ध सज्जन आग्रहपूर्वक सुकरात को अपने निवास पर ले गये। भरा-पूरा परिवार था उनका, घर में बहु- बेटे, पौत्र-पौत्रियां सभी थे। सुकरात ने वृद्ध से पूछा-आपके घर में तो सुख-समृद्धि का वास है। वैसे अब आप करते क्या हैं? इस पर वृद्ध ने कहा-अब मुझे कुछ नहीं करना पड़ता। ईश्वर की दया से हमारा अच्छा कारोबार है, जिसकी सारी जिम्मेदारियां अब बेटों को सौंप दी हैं। घर की व्यवस्था हमारी बहुयें संभालती हैं। इसी तरह जीवन चल रहा है। यह सुनकर सुकरात बोले किन्तु इस वृद्धावस्था में भी आपको कुछ तो करना ही पड़ता होगा। आप बताइये कि बुढ़ापे में आपके इस सुखी जीवन का रहस्य क्या है? वह वृद्ध सज्जन मुस्कुराये और बोले मैंने अपने जीवन के इस मोड़ पर एक ही नीति को अपनाया है कि दूसरों से अधिक अपेक्षायें मत पालो और जो मिले, उसमें संतुष्ट रहो। मैं और मेरी पत्नी अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व अपने बेटे- बहुओं को सौंपकर निश्चिंत हैं। अब आवश्यकता देखकर अपने स्वयं के कार्य हम अपने हाथो से कर लेते है और संभव हो तो परिजनो का हाथ भी बंटा देते है शेष समय में अपने पौत्र- पौत्रियों के साथ हंसते-खेलते है। मेरे बच्चे जब कुछ भूल करते हैं। तब भी मैं चुप रहता हूं। मैं उनके किसी कार्य में बाधक नहीं बनता। पर जब कभी वे मेरे पास सलाह-मशविरे के लिए आते हैं तो मैं अपने जीवन के सारे अनुभवों को उनके सामने रखते हुए उनके द्वारा की गई भूल से उत्पन्न् दुष्परिणामों की ओर सचेत कर देता हूं। अब वे मेरी सलाह पर कितना अमल करते या नहीं करते हैं, यह देखना और अपना मन व्यथित करना मेरा काम नहीं है। वे मेरे निर्देशों पर चलें ही, मेरा यह आग्रह नहीं होता। बुजुर्ग सज्जन की यह बात सुन कर सुकरात बहुत प्रसन्न हुये। इस आयु में जीवन कैसे जिया जाए, यह वे समझ चुके थे। अभिप्राय यह है कि पीढ़ी के टकराव को मौन द्वारा टाला जाना संभव है। नव पीढ़ी की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने वृद्धजनो के अनुभवो का हमेशा लाभ लेते रहे। उनकी भावनाओं को उन्हें अपाहिज समझ कर विस्मृत ना कर दे और उस समय की कल्पना अवश्य कर ले जब उम्र के उस दौर में वे स्वयं भी आएगे और अपने आपको असहाय होता पाएंगे। ध्यान रखे समय के साथ खाली हुई उनकी कुर्सी आपको बहुत वेदना देगी।
DINESH K.GARG ( POSITITY ENVOYER)
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