हर पल अपना

Dinesh Garg
कुछ ख्बाब पलते है आंखो में, कुछ उम्मीदे जागती है मन में, मन का विश्वास एक नई राह दिखता है और हम चल पड़ते है एक नए सफर पर जहां कामयाबी हमारा इंतजार कर रही होती है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि हमें अपनी तरक्की दूसरे से कम लगने लगती है और बार बार ये अहसास मन को चोटिल करता रहता है कि आखिर हम उनके जैसे क्यो नहीं है ? हमारे पास वो सब क्यो नहीं है जो दूसरो केपास है। ऐसी सोच का नतीजा फिर वही ईष्र्या, द्वेष की भावना पर इसका क्या फायदा। कमी जब खुद हममे है तो हम दूसरो से खुद की तुलना क्यों करने लगते है?
वैसे भी हम अतीत को टटोले तो पांएगे कि आज हम जहां भी है, जो भी है वो खुद हमने ही तो चाहा था हम क्या बनना चाहते है,कहां तक पंहुचना चाहते हैं ये सब हमारे ही तो ख्बाबों में पल रहा था। कामयाबी किसी की जागीर तो नहीं कि जब चाहा पा लिया उसके बीज हमें खुद बोने होते है। अपनी इच्छा शक्ति और लगन से उसे सींचना होता है,पाना होता है। दरअसल तकलीफ यहां से शुरू होती है कि हम कुछ पाने के लिए वक्त का इंतजार भर करते रह जाते है और मौका कब हाथ से निकल जाता है हमें खबर तक नहीं होती। कुछ करने के लिए वक्त का इंतजार क्यों किया जाएं। कुछ कर गुजरने का जिस वक्त ख्याल आया उसी वक्त से शुरूआत कर लो फिर देखना कामयाबी खुद ब खुद चली आएगी आपके कदमो तले।
किसी भी अच्छे कार्य को करने का शुभ मुहुर्त नहीं हो सकता केवल प्रयासो की प्रति पवित्रता व पूर्ण समर्पण होना आवश्यक होता है। वैसे भी जीवन की सार्थकता तभी है जब उसमे उंमग हो और ढ़ेर सारा प्यार हो। एक ऐसा अमिट प्यार जिसमें ईष्र्या व स्वार्थ का नामोनिशान ना हो। देने की भावना सदैव मन में तैरती रहे। यह मौका प्रत्येक के जीवन में आ सकता है लेकिन उसके लिए केवल और केवल एक कदम हमे ही तो चलना होगा। रिश्तो को संजोने के लिए उसमें त्याग के बीज हमे ही बोने होगे तभी जीवन की खुशियां चहचहा उठेगी। क्यूं ना यह प्रयास आज से ही प्रारंभ कर ले और जीत ले जीवन की जंग को।

DINESH K.GARG ( POSITITY ENVOYER)
dineshkgarg.blogspot.com

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