j k gargनकारात्मक और विनाशकारी प्रवृत्तियां यानि स्ट्रेस तनाव चिंता भय क्रोध निराशा चिड़चिड़ापन हड़बड़ी अधीरता परस्पर अविश्वास घृणा शक वहम आदि से हमारी अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ खराब होती है जो शरीर में विभिन्न रोगों से ग्रसित करवाने में मुख्य भूमिका निभाती है। यदि हमारा चेहरा सदैव मुस्कराता हुआ प्रसन्नचित्त रहे तो निश्चित ही हम अनेक रोगों और विनाशकारी प्रवृत्तियांसे अपने आपको आसानी से बचा सकते हैं। मुस्कराने से जहाँ एक तरफ हमारी कार्यक्षमता बढ़ जाती है वहीं दूसरी तरफ हमारी सोच भी नकारात्मक के बजाय सकारात्मक हो जाती है। अकारण भी मुस्कराने से भी अनचाहे तनाव, भय, चिंता, अशांति, स्वतः दूर भाग जाते हैं। हंसने हंसाने वाला आदमी प्रतिकूलता और वियोग में भी समता और निर्भीकता जीवन जीता है जिससे उसमे प्रेम, मैत्री,आनन्द, प्रसन्नता बढ़ने लगती हैं। उसका चिंतन सकारात्मक होने लगता है, सकारात्मक भाव पैदा होते हैं, जिससे शरीर के लिए उपयोगी रसायन पैदा होने लगते हैं जिससे उसकी कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है। निसंदेह अशान्ति की आग से ग्रसित व्यक्ति के लिए हास्य एक वरदान होता है।
लाफ्टर से तन की शाररिक और मन की मानसिक थकान से छुटकारा पाया जा सकता है, शोधकर्ताओं ने मालूम किया है कि हार्दिक लाफ्टर से आदमी की मांसपेशियां 45 मिनट तक रिलेक्स रहती हैं | लाफ्टर शरीर की बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधात्म्क शक्ति को बडाता भी है हास्य चिकित्सा से शरीर में मोजूद विजातीय तत्त्वों को विसर्जित और नष्ट करने की अद्दभुत क्षमता है |