एक यही है हमारी सभी से प्रिय साथी,
दुश्मनों का जो संहारक है यही साथी।
हार को भी जीत पल-भर में बना देती,
हर समय हमारे साथ में है यही रहती।।
रायफल का नाम दिया हमने जिसको,
हर एक जवान हाथ में रखता इसको।
इसके बिना हर जवान रहता है अधूरा,
और हमारे बिना यह भी रहती अधूरी।।
रात-दिन हम दोनों रहते है साथ-साथ,
बगल में लेकर इस को सोतें हम रात।
स्वयं से भी ज़्यादा इसको प्यार करते,
साफ सफाई का विशेष ख्याल रखते।।
अपनें आप यह कभी भी चलती नही,
गलती पर यह किसे भी छोड़ती नही।
निकली हुई गोली यह वापस न आती,
हीट हुआ तो फिर वह ढ़ेर कर जाती।।
जबतक करेंगें हम इस वतन की सेवा,
छोड़ेंगे नही इसको कभी भी अकेला।
ऐसे रखते है जैसे ख़ास अंग है हमारा,
दुश्मनों का करती यह सफ़ाया सारा।।
रचनाकार ✍️
गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान
[email protected]