*लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी*

शताब्दियो पूर्व महान कवि कबीर दास ने कहा था निंदक नियरे राखिए…..
ज्ञानी विद्वानों का भी कहना है कि व्यक्ति अपने विरोधी या विपक्षी की बातों को धेर्य पूर्वक सुनकर और अपनी कमियों में, सुधार कर,जीवन में आगे बढ़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर विपक्षी दल मुख्यत कांग्रेस द्वारा आरोप लगाए जाते रहे हैं कि मोदी सरकार तानाशाह हैं जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। सरकार की कार्यप्रणाली का विरोध करने वालों पर बदले की कार्रवाई की जाती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार लगा चुके हैं ।

राजनीति में अक्सर सत्ता तथा विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं।
मणिपुर में हो रही उपद्रवी घटनाओं पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को जमकर कोसा है इस मामले में कांग्रेस तथा विपक्ष ने संसद की कार्यवाही में हंगामा किया गया।
वहीं राजस्थान सरकार के मंत्री राजेंद्र गुड्डा ने एक कटु सत्य बोल दिया कि मणिपुर में हो रही घटनाओं के बजाय हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। और राजस्थान में बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के बारे में क़दम उठाने चाहिए।
गुढ़ा ने गलत नहीं कहा। कहावत भी है कि कि पहाड़ पर लगी आग देखने की बजाय अपने पैरों में लगीं आग देख तथा बुझाने के प्रयास करने चाहिए।
लेकिन सत्य कड़वा होता है राजनीति में सत्य बोलने वालों को उनके आका सहन नहीं कर सकते। गुढ़ा ने कटु सत्य कहा और 24 घंटे से पहले ही कांग्रेस ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया।
दूसरी ओर पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक ने राज्यपाल पद पर रहते हुए तथा कार्यकाल पूरा होने के बाद कई बार मोदी सरकार की बुराई की। राज्यपाल पद कार्यकाल पूरा होने के बाद भी आज तक मोदी के खिलाफ भड़ास निकाल रहे हैं
और मोदी आज तक मलिक के बारे में मौन है।मौन भी अपने आप में एक बेहतर जवाब है।

भाजपा शासित उत्तर प्रदेश गुजरात सहित अन्य राज्यों में महिला उत्पीडन पर सहानूभूति जताने वाली तथा आवाज उठाने वाली, “लड़की हूं लड़ सकती हूं” अब राजस्थान में हों रहे महिला अत्याचार पर क्यो नही बोलती । राजस्थान में कोई दिन ऐसा नहीं होता जब अखबारों में हत्या गला काटने जैसी घटनाएं नहीं आती।
जलते मणिपुर पर कैंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर है। लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री के गृह नगर में 19जुलाई को छः महीने की मासूम बच्ची को माता पिता सहित 4 परिजनों के साथ जला दिया जिस पर कांग्रेस चुप है। बोलने पर राजेंद्र गुढ़ा मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गए हैं। मोदी पर तानाशाही तथा अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटने का आरोप लगाने वाले अब कहां है? सार यह है कि राजनीति वालों को जहां अपना लाभ दिखता है वहां पहुंच जाते हैं । जबकि हकीकत में जनता के दुखदर्द से उन्हें ज्यादा मतलब नहीं।

हीरालाल नाहर
22-7-2023

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