बतरस-3 राजनीति में वर्ल्ड कप

पहले वाले माननीय आज बहुत खुश है .. हालाँकि उनकी ख़ुशी में वही रौद्रता है जो उनके ग़ुस्से को बिना बोले बयान करती है। कहने का मतलब उनकी ख़ुशी में भी उनसे उलझना अपने आप को नई उलझन में डालना ही है ।
दूसरी ओर दूसरे क़िस्म के माननीय विचार मग्न किसी उलझन को सुलझाते से नज़र आ रहे हैं, यूँ दूसरे वाले का विचार विहिन होकर विचारमग्न होना भी चौका रहा है तदापि उनके चेहरे से ख़ुशी या दुःख का भाव लगभग उड़ा हुआ सा है ठीक वैसे ही जैसे पूरा दिन निकलने पर पत्तियों पर जमे ओस के कण स्वतः ग़ायब हो जाते हैं ।
दोनों क़िस्म के माननीय एक दूसरे को टटोलने वाली निगाहों से देखते- देखते अचानक मुस्कुरा उठे। एक ही समय, एक सी मुस्कान, का एक साथ दोनों चेहरों पर उभारना, दोनों को अपना- अपना उपहास लगा। उपहास तीखा करने के लिए पहले वाले ने दूसरे से कहा-“ और कहो..? जीत गई इंडिया ..! इंडिया को कम स्कोर करके भी जीतना आता है ..!”
दूसरे माननीय ने एक मुस्तैद फ़िल्डर की तरह क्रिकेट के जुमले को लपक कर राजनीति के विकेट पर कुछ यूँ फेंका कि सामने वाले को रन आउट करके ही मानेगे, “जी, हाँ ..! इंडिया जीत गई ..! यह बात समझने में आपको बड़ी देर लगी .. इंडिया हार कर भी जीत गई ..।”
पहले वाले माननीय को लगा कि इंडिया का अनावश्यक ज़िक्र महँगा पड़ सकता है यानि कि इस तरह बिना बात भागकर रन नहीं लेना था।
सुरक्षित क्रीज़ में पहुँच कर उन्होंने फिर से दूसरे माननीय को ललकारा, “ अरे मैं इंडी वाली इंडिया की बात नहीं कर रहा हूँ..मैं तो उस इंडिया की बात कर रहा हूँ, जिसके लिए तुम कह रहे थे कि इतना कम स्कोर .. ! कैसे जीतेंगे ..? स्कोर कम हो या सीटें… राष्ट्रभक्त हमेशा जीतते हैं..।“
इस बार इंडिया की जगह राष्ट्र का ज़िक्र कुछ इस अन्दाज़ में किया मानो लूज़ गेंद को बाउंड्री के बाहर ही पहुँचा रहे हो। दूसरे वाले माननीय गिरते-पड़ते किसी तरह बात सम्भाल पाए लेकिन बात के रन तो पहले वाले के खाते में आ ही गए थे।
इस बार दूसरे वाले ने अपनी बात को लाइनऔर लेंक्थ के साथ सधे शब्दों में कहा, “ सरकार बनाने से क्या होता है …अभी तो पार्टी शुरू हुई है .. ।”
एक बार फिर पहले वाले आगे बढ़कर बात पर यूँ टूटे मानो आख़िर ओवर में स्कॉर चेज़ करना ज़रूरी हो, “ देखते रहे ..तुम देखते ही रहना..अब देश नहीं रुकेगा..वह आगे बढ़ेगा..। महाशक्ति बन कर रहेगा..”
दूसरे माननीय ने स्पिन अंदाज़ में को अपहले वाले को उकसाया । “ जी,सही कहा..इंडिया महान है.. वह अब नहीं रुकेगा..आगे बढ़ेगा..ना अहंकार सहेगा ना किसी से डरेगा..“
उसके बाद भी देर तक पहले और दूसरे माननीय क्रिकेट के अंदाज़ अपनी अपनी पार्टियों की तरफ़ से टी-20 खेल रहे.. हम समझ गए यह वर्ल्ड कप का बुख़ार बारस्ता राजनीति दोनों माननीय की तरह करोड़ों ख़ाली दिमाग़ों में घर कर चुका है ।

*रास बिहारी गौड़*

error: Content is protected !!