नया साल एक नया सवेरा,
बीते कल से सीख का घेरा।
अनुभवों की गठरी संग लिए,
आगे बढ़ने का देता फेरा।
जो बीत गया, वह शिक्षक है,
जो आने वाला, अवसर है।
हर क्षण में छिपा है संदेश,
कर्म ही जीवन का आधार है।
जीवन की शुरुआत में जो,
लक्ष्य अपना तय कर लेता है।
संकल्प, श्रम और साधना से,
सफलता का पथ चुन लेता है।
नववर्ष कहता रुक मत जाना,
सत्कर्मों को अपनाना।
हर दिन एक कदम आगे बढ़कर,
अपने सपनों को सच बनाना।
निरंतर प्रयास, सच्ची लगन,
ले जाते हैं शिखर तक।
यही जीवन का परम सत्य है,
यही नववर्ष का अमृत वाक्य।
रचियता/लेखक
– डॉ0 ब्रह्मानंद राजपूत
(Brahmanand Rajput)
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