आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं

के.सी.जोनवाल

महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है देश मे महिलाओं के खिलाफ अपराधो में लगभग 7.3 फीसदी की बढ़त हुई है। घरेलू हिंसा से सम्बंधित विभिन्न समस्याए हमारे समाज मे व्याप्त है, जो महिलाओं के शोषण से जुड़ी है। आज हमारे देश मे भले ही महिलाओं को उच्च स्थान प्राप्त है, उच्च शिक्षा का अधिकार बराबरी का अधिकार प्राप्त है, उसके बावजूद भी सच्चाई यह है कि महिलाओं की स्तिथि सुदृढ़ नही है, अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी महिलाये हिंसा एवं शोषण, की शिकार होती रही हैं, भले ही सरकार ने स्त्रियों के लिए विभिन्न कानूनों का निर्माण किया है, फिर भी वह अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है, आखिर क्यों देश की सामाजिक व्यवस्था ऐसी है जहां प्राचीन काल से ही नारी को शोषित किया जाता रहा है। क्यो ना हमे बदलाव के साथ-साथ हमारी सोच को भी बदलना चाहिये, *So Stop violence against womens शिक्षा के के इस दौर में भी महिलाएं हिंसा एवं शोषण की शिकार हो रही है, विभिन्न अपराध उत्पीड़न ओर हिंसात्मक समस्याओं से महिलाएं आज भी जूझती आ रही है, और आज भी महिलाओं के प्रति दहेज प्रथा बरकरार है, ओर इससे जुड़े वास्तविक प्रताड़ना के कई ज्वलन्त उदहारण आये दिन देखने मे आते ही है, कई बार तो हिंसा के कई ऐसे प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते हैं कि “महिला को उसके मासूम बच्चों के साथ मार दिया गया” ओर ऐसी घटनाएं यदा-कदा वीभत्स रूप में नजर आती है, हमारे कानून में महिलाओ को सभी को संरक्षण की बात कही गई है, महिलाओं को कई संविधानिक, वैधानिक विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं, लेकिन ऐसे अधिकारों के बावजूद भी महिलाएं हिंसा एवं शोषण की शिकार हो रही है, सरकार ने महिलाओं के लिए अलग से अधिनियम, कानून तो बना दिये लेकिन उनके क्रियान्वयन में कही ना कहि ढील या जानकारी के अभाव में, शिक्षित और संपन्न महिलाएं भी शोषण की शिकार होती नजर आ रही है तो फिर उन अनगिनत पिछड़े वर्ग की अशिक्षित महिलाओं का क्या जो हर रोज समाज में कहीं ना कहीं हिंसा की शिकार हो रही हैं। उन्हें तो अपने अधिकार और कर्तव्यों का भी पता नहीं वह तो सिर्फ एक ही अधिकार जानती हैं कि मैं महिला हूं और महिलाओ को सब कुछ सहन करना पड़ता है, ओर ये वास्तविकता है कहने को तो आज की नारी इक्सवी सदी की नारी है जो हर दरों दीवार पार कर देश-प्रदेश में दुनिया मे नित् नई ऊंचाइयों पर पहुच चुकी है, लेकिन हर जगह अपनी प्रतिभा और क्षमता को साबित करने के बावजूद भी हिंसा की शिकार हो रही है।

 

अधिवक्ता के.सी.जोनवाल *आवाज-ऐ-कलम.

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