*केवल वादों की सूची नहीं, बल्कि बंगाल के पुनर्निर्माण का व्यावहारिक खाका है।*
– केशव कुमार भट्टड़
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वाम-लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष शक्तियों ने “बंगाल को बचाने के लिए” घोषणा-पत्र जारी किया है। यह दस्तावेज़ राज्य में व्याप्त अराजकता, लूट, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति का स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत करता है। घोषणा-पत्र का मूल मंत्र है — “सभी का बंगाल, सभी के अधिकार”। इसमें रोजगार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण और प्रशासनिक सुधार जैसे 22 क्षेत्रों में विस्तृत नीतियाँ दी गई हैं। नीतियों का आधार लूटतंत्र पर अंकुश लगाकर बचत करना और जन-उन्मुख विकास है।
कुछ प्रमुख घोषणाओं पर विचार करते हैं।
रोजगार: आयहीन हर परिवार को स्थायी आय –
घोषणा-पत्र रोजगार को विकास का मूल आधार मानता है। अगले पाँच वर्ष में 40 लाख स्थायी नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 25 लाख उद्योग-लॉजिस्टिक्स क्षेत्र, 20 लाख ग्रामीण क्षेत्र और 15 लाख प्रौद्योगिकी-आधारित रोजगार शामिल हैं। हर आयहीन परिवार में कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। ‘नेताजी सुभाष युवा सेवक योजना’ के तहत युवाओं को प्रशिक्षण के साथ मासिक 2000 रुपये भत्ता मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ‘कर्मभूमि पोर्टल’ के माध्यम से स्थायी नौकरी दी जाएगी। गाँवों में 200 दिन और शहरों में 120 दिन का काम तथा 600 रुपये दैनिक मजदूरी की गारंटी रहेगी। सरकारी खाली पद पाँच वर्ष में भर दिए जाएँगे और प्रत्येक पंजीकृत बेरोजगार को कम से कम दो कॉल लेटर, यानी दुगुने अवसर, दिए जाएँगे। इससे सभी को अवसर मिलेंगे और भाई-भतीजावाद की संस्कृति समाप्त होगी।
कृषि: किसानों की आय सुरक्षा।
घोषणा पत्र में कृषि नीति का केंद्रबिंदु स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश है। 16 प्रमुख फसलों (धान, गेहूँ, दालें, तिलहन आदि) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) डेढ़ गुना (1.5 गुना) बढ़ाया जाएगा। स्वामीनाथन आयोग (2004-2006) ने MSP को उत्पादन लागत (C2) + 50 प्रतिशत लाभ का सूत्र दिया था, जिसका उद्देश्य किसान संकट और आत्महत्याओं को रोकना था। यह देश में आज तक अपने पूर्ण रूप में लागू नहीं हुआ है। साथ ही पंचायत-आधारित सहकारी समितियों के जरिए दलाल-मुक्त खरीद-बिक्री व्यवस्था, ब्लॉक स्तर पर कोल्ड स्टोरेज, छोटे सिंचाई प्रोजेक्ट और उन्नत बीज सस्ते दाम पर उपलब्ध कराए जाएँगे। यह कृषि कर्म को सशक्त बनाते हुए किसानों की स्थिति को निश्चित रूप से बेहतरीन बनाएगा।
शिक्षा: ज्ञान-आधारित बंगाल का पुनर्निर्माण
राज्य बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने की नीति घोषित की गई है। स्नातक स्तर तक ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ होगी। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित पर जोर दिया जाएगा। स्कूल, मदरसा और कॉलेज में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएँगे। व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। शारीरिक व्यायाम, खेल, संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का विकास हर संस्थान में अनिवार्य होगा। पारदर्शी भर्ती से सभी खाली पद भरे जाएँगे। शैक्षणिक परिसर गुंडागर्दी से मुक्त होंगे और हर स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकार स्थापित किए जाएँगे। सरकारी पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण कर उन्हें सूचना-भंडार और कैरियर प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। यह नीति बंगाल के शिक्षा जगत में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बढ़े हुए रोजगार के अवसर बंगाल को अग्रणी बनाने में समर्थ होंगे।
स्वास्थ्य: हर नागरिक को सुलभ चिकित्सा ।
स्वास्थ्य पर राज्य बजट का 10 प्रतिशत आवंटन होगा। हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज और हर विधानसभा क्षेत्र में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जाएँगे। पहाड़ी क्षेत्र में नया मेडिकल कॉलेज बनेगा। हर ब्लॉक में कम्युनिटी क्लिनिक खोले जाएँगे। सरकारी अस्पतालों में सस्ती दवा, जाँच और इलाज का अधिकार सबको मिलेगा। बुजुर्गों के लिए ‘स्वास्थ्य सेवा’ योजना शुरू होगी। हर महकमे में आधुनिक जेरियाट्रिक केयर होम बनाए जाएँगे। मानसिक स्वास्थ्य को व्यावसायिक स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा माना जाएगा।
खेल: युवा शक्ति का विकास ।
हर जिले में आधुनिक खेल मैदान, परिसर और प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएँगे। स्थानीय क्लबों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य से ब्लॉक स्तर तक खेल विशेषज्ञ समितियाँ गठित होंगी। युवा-युवतियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने वाले क्लबों को सालाना अधिकतम दो लाख रुपये दिए जाएँगे। बड़े क्लबों को परिवार-तंत्र से मुक्त किया जाएगा।
संस्कृति: बंगाल की विरासत का संरक्षण ।
फिल्म उद्योग और सरकारी सिनेमाघरों को दल-तंत्र से मुक्त किया जाएगा। हर जिले में संस्कृति केंद्र खोले जाएँगे। ‘नंदन’ सहित सभी सरकारी सिनेमाघरों की गरिमा लौटाई जाएगी। लोक संस्कृति और आधुनिक रचनात्मक संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। बंगाल के महापुरुषों के जन्मदिन स्कूल-मदरसों में मनाए जाएँगे। आदिवासी सहित हर जनजाति की भाषा, संस्कृति और कला के लिए विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित होंगे। स्वतंत्र बंगला फिल्मों को सिंगल स्क्रीन पर प्रदर्शन का मौका मिलेगा और युवा निर्देशकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
प्रमुख नीति बिंदुओं पर बात करते हुए वित्तीय व्यवस्था देखनी जरूरी हो जाती है। घोषणा पत्र स्पष्ट करता है कि घोषित योजनाओं को लागू करने के लिए जरूरी वित्त की व्यवस्था स्व-स्रोत मॉडल से की जाएगी। सभी योजनाओं का खर्च बिना कोई नया कर लगाए पूरा किया जाएगा। मुख्य स्रोत सिंडिकेट और कटमनी बंद करने से मिलने वाली 50,000 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत है। भ्रस्टाचार की गहरी खाई जिस धन को निगलती रही है, उसी बचाए गए धन की राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे पर होगा। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए “विकास बांड” जारी कर आम जनता से सीधा निवेश लिया जाएगा।
एक नजर में प्रमुख वादे
– हर आयहीन परिवार को कम से कम एक स्थायी नौकरी; पंजीकृत बेरोजगारों को कम से कम दो कॉल लेटर।
– शहर में 120 दिन, गाँव में 200 दिन काम और 600 रुपये दैनिक मजदूरी की गारंटी
– पाँच वर्ष में सभी सरकारी पद भरना; पारदर्शी, एसएससी, पीएससी, सीएससी परीक्षाएँ।
– मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन; समान काम के लिए समान वेतन; कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच।
– 16 फसलों का MSP लागत का डेढ़ गुना।
– शिक्षा पर 20 प्रतिशत और स्वास्थ्य पर 10 प्रतिशत बजट।
– गैर-आयकरदाताओं के लिए 100 यूनिट बिजली मुफ्त, 200 यूनिट आधी कीमत पर।
– माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों पर सख्त कार्रवाई।
– नदी कटाव रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े कानून।
– भ्रष्टाचार की जाँच के लिए विशेष आयोग।
– पाँच वर्ष में 20 लाख स्वनिरभर समूह; हर जिले में स्वायत्त ‘अभया वाहिनी’।
– गरीब बुजुर्गों को 6000 रुपये मासिक वृद्धावस्था भत्ता।
– अल्पसंख्यक-अनुसूचित जाति-जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा, आरक्षण और विकास बोर्ड।
समग्र प्रभाव :
घोषणा-पत्र लागू होने पर बंगाल की तस्वीर बदल जाएगी। आर्थिक मोर्चे पर बेरोजगारी घटेगी, युवा पलायन रुकेगा, उद्योग पुनर्जीवित होंगे और कृषि मजबूत होगी। इससे सहायक आपूर्ति प्रणाली तेजी से विकसित होगी जिससे नए कर्म क्षेत्रो का निर्माण होगा। यह आय बढ़ाने और आय के नए स्रोत खोलने में प्रभावी भूमिका निबाहेगा। घोषित नीतियों से सामाजिक क्षेत्र में शांति-सद्भाव बढ़ेगा। महिलाओं, पिछड़ों और अन्यान्य वर्गों को सम्मान के साथ सुरक्षा मिलेगी। प्रशासन भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी बनेगा। शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार से बंगाल की बौद्धिक विरासत लौटेगी। खेल-संस्कृति युवा प्रतिभाओं को निखारेगी और पर्यावरण संरक्षण से सुंदरवन व जंगल महल की रक्षा होगी। यह घोषणा-पत्र केवल वादों की सूची नहीं है, बल्कि बंगाल के पुनर्निर्माण का व्यावहारिक खाका है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश, 50,000 करोड़ की बचत और जन-निवेश का मॉडल इसे ठोस विकल्प बनाता है। अन्य दलों के दावों से हटकर बगैर किसी कोलाहल के यह घोषणा पत्र जनता का जीवन स्तर सुधारते हुए ठोस विकास पर जोर देता है। साथ ही सरकार में सीधी जन भागीदारी की वकालत करता है जो सही अर्थों में संवैधानिक लोकतंत्र की भावना का सम्मान है।
कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं हो सकता।
एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों।