गीत

मनोहरसिंह चौहान

कभी  यूंही  मेरे  मीत,  छत  पर  आया   करो।

ये   प्रेमी  नादान  है,   इसे  न  सताया  करों।।
आँख टिकी हैं लोगो की,प्रिये हम पर हरदम ।
हाथ हिलाया करो सदा, तुम मुस्कराया करो।।
मीठे  ख्याल है  काफी, जिंदगी  कट जाएगी।
कभी पास आ नजर से,नजर मिलाया करो।।
गर सच्चा  प्रेम हो न हो, मीत  हमें  गम नहीं।
मैं प्रेम के भ्रम में रहूं, तुम मुकर जाया करों।।
ये नशा  प्यार का  मुझपे, सदा  चढ़ा  ही रहे।
भले प्रेम  के  तुम  झूठे,  पाठ पढ़ाया  करों।।
गीतकार मनोहरसिंह चौहान मधुकर
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