तनाव, अवसाद या चिंता से मुक्त करने मे सहायक सिद्ध होती है Cognititve Defusion

मनीषा शर्मा

वर्तमान समय मे भाग दौड़ भरी जीवन शैली के बीच नकारात्मक विचारों का उमड़ना आम बात है। कई बार व्यक्ति इन्ही मे उलझ कर रह जाता है, जिस से उसका व्यक्तिगत, सामाजिक एवं प्रोफेशनल जीवन भी प्रभावित होता है। Cognititve Defusion यानि संज्ञानात्मक अलगाव Acceptance and Commitment Therapy (ACT) technique अर्थात स्वीकृति और प्रतिबद्धता चिकित्सा (ACT) की एक प्रमुख तकनीक है। ये मनोविज्ञान की वह असरदार तकनीक है जो व्यक्ति को तनाव , अवसाद या चिंता से मुक्त करने मे सहायक सिद्ध होती है। अक्सर व्यक्ति जब अपने विचारों से खुद को जोड़ कर उनका कैदी बन जाता है तब उसके विचार ही उस पर हावी होने लगते हैं। ऐसे मे पुन वास्तविकता का बोध होना कठिन हो जाता है। उदाहरण के लिए जब हम अपने दोनों हाथों की हथेलियों को अपनी आँखों के नजदीक ले आते हैं तब हमें सामने का दृश्य नजर नहीं आता। ऐसे मे ये मान  लेना की सामने कोई दृश्य मौजूद ही नहीं है, गलत है। लेकिन वही अगर हम अपने हाथों को आँखों के सामने से हटा लें  तो सामने का दृश्य हमारे सामने स्पष्ट हो जाएगा। दिमाग के  खेल मे उलझ कर केवल उतना ही देखना और समझना जितना हमारा दिमाग हमे दिखना और समझाना चाहता है, चिंता – अवसाद का कारण बनता है। ऐसे में Cognititve Defusion यानि संज्ञानात्मक अलगाव तकनीक बेहद कारगर साबित होती है। इसके लिए विचारों को अपने व्यक्तित्व से अलग करना होता है। उदाहरण के लिए यदि दिमाग ये कहे की “आप फलां काम नहीं कर सकते” तो आपको बस खुद से इतना कहना है की “मेरा दिमाग मुझे ऐसा महसूस करवा रहा है की मैं फलां काम को नहीं कर सकता। ” बस वाक्य मे इतना जोड़ने पर सोच की दिशा बदलने लगेगी। दिमाग मे उत्पन्न नकारात्मक विचार की गंभीरता काम होती जाएगी। आप स्वयं दिमाग द्वारा दिए गए नकारात्मक विचार को चुनौती के रूप मे स्वीकार कर इसे दूर करने क प्रयास मे लग जाएंगे। इस से ना सिर्फ आपकी क्षमताओं का विकास होगा बल्कि आप विचारों के गुलाम बनने से भी बच जाएंगे। इस तकनीक के तहत आप नकारात्मक विचारों की गंभीरता को कम करने के लिए उन्हे मजाकिया लहजे मे खुद से कहें। साथ ही अपने दिमाग को ऐसी परिस्थिति मे धन्यवाद देना ना भूलें, जिसने आपको नकारात्मकता के प्रति सचेत किया। दिमाग मे विचार आना गलत नहीं है। लेकिन स्वयं को उन विचारों का गुलाम बना लेने से व्यक्ति के जीवन का प्रत्येक क्षेत्र प्रभावित होता है। Cognititve Defusion इसी समस्या के समाधान की असरदार चाबी है।

 मनीषा शर्मा

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