कन्यादान से कन्या के नाम राशि हड़पने तक : दो दशक में बदल गया जमाना

हीरालाल नाहर

करीब 15-20 वर्षों पहले कन्या दान का भारतीय संस्कृति में बड़ा धार्मिक महत्व था । *कन्यादान के बिना व्यक्ति के जीवन की सार्थकता नहीं मानी जाती थी।* हर माता पिता की भावना होती थी कि कन्यादान करके अपने जीवन के एक बड़े (ऋण)भार से  मुक्त महसूस करे।जिन माता पिता के पुत्री नहीं होती वे अपने परिचित या रिश्तेदारो की पुत्री को *गोद लेकर कन्यादान* (शादी)करते थे। ताकि परम्परागत मान्यता के अनुसार ऋण से मुक्त हो सके।

      *बेटी की शादी होने के बाद उसके ससुराल में भोजन तो दूर पानी तक नहीं पीते थे। क्यों कि बेटी के ससुराल से कोई भी चीज वस्तु यहां तक कि पानी भी लेना भारतीय संस्कृति में भार यानि ऋण माना जाता है।*
         गत वर्षों में शानो-शौकत, झूठा दिखावा आधुनिकता के जमाने में हमारी संस्कृति पूर्वजों द्वारा बनाए गए रीति रिवाज भी किनारे कर दिए गए हैं।
     *कई लोगों ने अब कन्या  दान को धर्म की जगह धन का अमीरों से धन ऐंठने साधन बना दिया है।*
      सात जन्मों का *पवित्र रिश्ता कहा जाने वाला विवाह संस्कार आर्थिक सौदा बन गया है।* कई जातियों में शादी के लिए रिश्ते तय करते समय बेटी के परिजन नकदी, रकम  की मांग करते हैं तो ऐसा लगता है कि हमारी धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्म जन्म रिश्ता निभाने की बात कर रहे हैं या बेटी का सौदा कर रहे हैं।
          कई निकृष्ट लोग तो *योजनाबद्ध तरीके से धन ऐंठने के लिए षडयंत्रपूर्वक अमीर परिवार में अपनी बेटी का रिश्ता कर अपने सुनहरे भविष्य का सपना देखने लगते हैं।*
        शादी तो दूर आजकल सगाई करके कुछ महीनों बाद *सगाई तोड़कर लड़के वालों से रकम झपटने के मामले भी सामने आने लगे हैं।*
         ऐसे में लड़के वालों के सामने अपने पुत्र के रिश्ते तय करना एक समस्या बन गई है। वे बहुत ही सतर्कता और सावधानी बरतने की जरूरत महसूस करने लगे है। *प्रेम प्यार किसी से शादी किसी और से, सावधानी हटी दुर्घटना घटी। अब सड़क के सफर के लिए नहीं जीवन के सफर में भी अनिवार्य हो गया है।* अन्यथा नए रिश्ते बनाते समय धोखा हो सकता है।
      लड़कियों के माध्यम से धन ऐंठने के लिए हनी ट्रेप के मामले भी पिछले वर्षों में बढ़े हैं तथा सरकार पुलिस प्रशासन के माध्यम से लोगों को हनी ट्रेप से बचाव के लिए जागरूक करती है।
   कुल मिलाकर कर सार यह है कि भौतिकता, दिखावे और चकाचौंध की इस दुनिया में अपने *सुख शांति में व्यवधान न हो इसके लिए सावधान* और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
आप अपनी प्रतिक्रिया मेरे नंबर पर भेज सकते हैं।
*हीरालाल नाहर पत्रकार लेखक व चिंतक*
*9929686902*

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