कुचला जाता है
कुत्ते का पिल्ला
दुःख होता है …….
दुःख तो होता है
थोड़ी देर के लिए
मील के पत्थरों से नज़र भी हटती है
दूसरी कारो से
पिछड़ जाने का डर होता है
हालाकिं उसकी चीख
कानों तक नही पहुँचती
पिछली सीट से देखते हैं
कुछ लाल धब्बे
दुःख होता है
गति के कारण
इन्हें इकठठा नही कर पाए
चेहरे पर कुछ
और चमक आ जाती
श्रणांश के लिए
ख्याल भी आता है
कही धब्बे वापस उठ कर
कार के पीछे भौकना न शुरू कर दे
तभी
साइड ग्लास से
चमड़े की जाकेट
निहारते हुए
मुस्कान उभरती है
जो एक बार मर जाता है
वो जी भी जाये तो भौकं नही सकता
फिर कानून जानता है
कार के पीछे
कुत्तों का भौकना
एक उपद्रव है
फुटपाथों को छोड़
सड़क का अतिक्रमण
अपनी भूख को दुसरो के पेट में ढूढने की साजिश
मानस गंध पर भरोसा
जमीन पर चलकर
हवा से बात करने की ताकत को
कोई शोर चुनोती दे
उसके चुप होने पर
दुःख तो होता है
पर उसे चुप होना ही होता है
अभिव्यक्ति है भौकना
गले में पट्टा बांध कर भौकना
पूछ हिलाते हुए भौकना
चार दिवारी के पीछे से भौकना
दहशत के लिए भौकना
भौकते हुए किसी पैदल पर
झपटना भी जायज है
पर कारो के पीछे भौकना
निजता में दखल है
गति की राह में अवरोध है
चेहरों को पहचाननें की कोशिश है
कोशिश कुचलने पर दुःख होता है
दुःख तो होता है…….
-रासबिहारी गौड
