बेटी ईशा ने दिया था जियो का आइडिया: मुकेश अंबानी

लंदन में ड्राइवर्स ऑफ चेंज अवॉर्ड प्राप्त करने के मौके पर किया खुलासा
लंदन, 16 मार्च, 2018: रिलायंस जियो ने दो साल के अंदर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा यूज करने वाले देश बना दिया। भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी को जियो का आइडिया उनकी बेटी ईशा अंबानी ने दिया था। इसका खुलासा मुकेश अंबानी ने खुद किया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को फाइनेशियल टाइम्स आर्सेलरमित्तल बोल्डनेस इन बिजनेस अवॉर्ड्स में ‘‘ड्राइवर्स ऑफ चेंज’ अवॉर्ड मिलने के मौके पर अंबानी ने बताया कि ईशा ने 2011 में उन्हें जियो का आइडिया दिया था। आज रिलायंस समूह तेल से लेकर टेलीकॉम तक कई क्षेत्रों में कार्यरत है और लगातार सफलताएं हासिल कर रहा है।
जियो का आइडिया आने के बाद से रिलायंस ने भारत के फोन मार्केट में 31 बिलियन डॉलर (2.01 हजार करोड़ रुपये) का निवेश किया है। 2016 में शुरू हुआ जियो ने टेलिकॉम मार्केट में एंट्री के साथ ही हलचला मचा दी और दूसरी कंपनियों को प्राइस वॉर में उतरने पर मजबूर कर दिया।
शुरुआती महीनों में फ्री कॉल्स और डेटा देकर जियो जल्द ही टेलिकॉम मार्केट में छा गया और चौथे नंबर की टेलीकॉम कंपनी बन गया।
जियो नई डेटा-हैवी सर्विसेज को प्रदान करने के लिए तैयारी कर रही है जो कि घरों, कारोबार और कारों को इंटरनेट से जोड़ देंगी।
अंबानी ने कहा कि युवा एवं प्रतिभाशाली भारतीय प्रतिभाओं के साथ भारत 2028 क विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगी और ये सफलता सिर्फ एक दशक में प्राप्त की जाएगी।
अंबानी ने बताया, जियो का आइडिया सबसे पहले मेरी बेटी ने 2011 में दिया था। तब वह येल यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी और छुट्टियों पर घर आई हुई थी। कॉलेज का कुछ काम करते हुए उसने कहा था कि ‘‘पापा हमारे घर का इंटरनेट बहुत बुरा है।’’
अंबानी ने कहा, ‘ईशा और उसका जुड़वा भाई आकाश भारत की युवा पीढ़ी हैं और ये जनरेशन बेस्ट बनने के लिए बहुत इंतजार नहीं करना चाहती। इन युवाओं ने मुझे यह मनवाया कि ब्रॉडबैंड इंटरनेट वह तकनीक है जिससे भारत को दूर नहीं रखा जा सकता।’
उन्होंने कहा कि उस समय भारत खराब कनेक्टिविटी से पीड़ित था और सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल रिसोर्स डेटा की एक गंभीर कमी थी। डेटा केवल दुर्लभ नहीं था, लेकिन यह कृत्रिम रूप से काफी महंगा था क्योंकि इसे बहुसंख्य भारतीयों के लिए अपरिवर्तनीय बनाया गया था।
जियो ने देश के हर हिस्से में प्रचुर मात्रा में और सस्ती और उपलब्ध डेटा प्रदान कर इस पूरे माहौल को ही बदल कर रख दिया।
उन्होंने कहा कि ‘‘हमने सितंबर 2016 में जियो लॉन्च किया था। और आज जियो पहले से भारत में सबसे बड़ा खेल बदलने वाली टेलीकॉम कंपनी बन चुकी है।’’
अंबानी ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1जी मोबाइल नेटवर्क का बीड़ा उठाया, यूरोप ने 2जी में प्रवेश किया और चीन ने 3जी के साथ छलांग लगाया, जियो ने दुनिया में सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड 4 जी एलटीई डाटा नेटवर्क बनाया है।
उन्होंने कहा कि ‘‘यह 2019 में भारत को 4 जी में एक अग्रणी बना देगा।’’ उन्होंने कहा कि भारतीय दूरसंचार उद्योग को अखिल भारतीय 2 जी नेटवर्क बनाने में 25 साल का समय लगा। जीओ ने 4 जी एलटीई नेटवर्क का निर्माण करने में सिर्फ तीन साल लिए, जो कि बहुत बड़ा और अधिक उन्नत है और यह आज भी 5जी के लिए भी तैयार है।’’
उन्होंने कहा कि जियो ने जीवनभर के लिए वॉयस कॉलिंग को फ्री बना दिया है और दुनिया में सबसे कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाला डेटा सर्विस भी उपलब्ध कराई है – अमेरिका के मुकाबले लगभग दस-दसवीं कीमतों में, उपलब्ध है। जियो ने शुरुआत के सिर्फ 170 दिनों में 100 मिलियन से अधिक ग्राहक हासिल कर लिए।’’ यह यूनाइटेड किंगडम की आबादी का डेढ़ गुना अधिक था।
500 मिलियन भारतीय अभी भी एक फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं और ना कि स्मार्टफोन का। जियो ने दुनिया का सबसे सस्ती 4 जी एलटीई स्मार्टफोन को पेश किया है जो कि 1500 रुपये की जमाराशि के साथ मुफ्त में उपलब्ध है। परिणाम आश्चर्यजनक रहा है और 3 लाख से 5 लाख भारतीय रोजाना जियो फोन पर आ रहे हैं और 200-300 रुपए की दर पर वे उच्च गति वाले इंटरनेट तक पहुंच के जरिए लाभ उठाते हैं, जिनकी मौजूदा वॉयस कॉलिंग पूरी तरह से फ्री है।
उन्होंने कहा कि जैसा कि इंटरनेट सभी भारतीयों के लिए सुलभ हो गया है और ऐसे ही देश अब सभी कुछ के लिए इंटरनेट में सबसे आगे होगा।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों के अंदर जियो भारत की विश्व स्तरीय डिजिटल सेवाओं का आनंद लेने के लिए यूरोप की दो-तिहाई जनसंख्या के समकक्ष को सशक्त बनाएगा। जियो के कारण ही आज भारत 155 के रैंक से बढ़कर नंबर एक मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा की खपत वाला देश बन गया है और ये सफलता दो साल से भी कम समय में हासिल की गई है।
उन्होंने कहा कि जियो जीयो पहले से ही भारत के इतिहास में सबसे बड़ा स्टार्टअप है।‘ड्राइवर्स ऑफ चेंज’ पुरस्कार प्राप्त कर चुके अन्य सम्मानित औद्योगिक समूहों एवं कंपनियों में डीपमाइंड टेक्नोलॉजीज (2016), एफएएनयूसी (2015), एचबीओ (2014), अलीबाबा (2013), मोंदररागन कॉरपोरेशन (2012), अमेज़ॅन (2011), एप्पल (2010), फिएट ( 2009) और रयानयर (2008) शामिल हैं।
यह पुरस्कार, हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और उत्पादन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, खुदरा और 4 जी डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नवाचार के नेतृत्व, शानदार वृद्धि के लिए आरआईएल की असाधारण प्रतिबद्धता को मान्यता प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि उनके दिवंगत पिता धीरूभाई अंबानी भारत के व्यापारिक इतिहास में मूल ‘ड्राइवर ऑफ चेंज’ थे। उन्होंने कहा कि महान उद्योगपति श्री धीरूभाई अंबानी ने ही 1966 में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की स्थापना 1,000 रुपए की राशि के साथ (उस समय लगभग 130 डॉलर) की थी।
आरआईएल, जो आज 50 अरब डॉलर से अधिक का समूह है, ने 1977 में अपनी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के बाद से साढ़े दो सालों में शेयरधारक को दोगुना किया है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि के दौरान, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किसी अन्य व्यवसाय समूह की तुलना में भारत की राष्ट्रीय संपत्ति में अधिक योगदान दिया है।

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