केयर्न करेगा भाग्‍यम ऑयल फील्‍ड से उत्‍पादन बढ़ाने के लिये नई टेक्‍नोलॉजी में निवेश, बेकर ह्यूजेस के साथ साझेदारी की घोषणा की

अबु धाबी, नवंबर 2021: तेल और गैस की खोज और उत्‍पादन करने वाली भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस ने बेकर ह्यूजेस के साथ साझेदारी की है। यह गठबंधन अभी अबु धाबी में चल रहे एडीआईपीईसी 2021 में हुआ है, जो ऑयल एंड गैस सेक्‍टर के सबसे बड़े समागमों में से एक है। इस साझेदारी के तहत केयर्न का लक्ष्‍य होगा अपने रिकवरेबल रिजर्व को मौजूदा 45 mmboe से बढ़ाकर 250 mmboe तक पहुँचाना। यह घोषणा भारत के 50% घरेलू क्रूड का उत्‍पादन करने के लिये अपनी क्षमता को दोगुना करने और ऊर्जा के मामले में आत्‍मनिर्भर बनने के हमारे देश के सफर में उसका साथ देने की कंपनी की प्रतिबद्ध के अनुरूप है।
इस अवसर पर केयर्न ऑयल एंड गैस के सीईओ प्रचुर साह ने कहा, “मौजूदा फील्‍ड्स से रिकवरी और प्रोडक्‍शन बढ़ाने के साथ शेल जैसे अपारंपरिक और पारंपरिक ईंधनों की नई खोज, अपनी उत्‍पादन क्षमता को दोगुना करने के लिये हमारी रणनीतियों में से एक है। हम पुराने और बूढ़े हो रहे फील्‍ड्स से प्रोडक्‍शन बढ़ाने के लिये नई टेक्‍नोलॉजी लाने की जरूरत पर जोर देते आ रहे हैं, क्‍योंकि उन फील्‍ड्स की क्षमता भारत के लिये लगभग 90% है। बेकर ह्यूजेस एनर्जी टेक्‍नोलॉजी में वैश्विक अग्रणी है और इस भागीदारी के साथ हमने अपनी क्षमता को 500 kboepd तक बढ़ाने की दिशा में एक अन्‍य कदम उठाया है।”
इस साझेदारी के तीन अलग चरण होंगे- तकनीकी सहायता और काल्‍पनिक डिजाइन, विस्‍तृत तकनीकी मूल्‍यांकन और पायलट का निष्‍पादन, और फील्‍ड के विकास की पूर्ण योजना और निष्‍पादन।
केयर्न देश भर में अपने फील्‍ड्स में तकनीक के कार्यान्वयन में अग्रणी रहा है। राजस्थान में मंगला क्षेत्र एक फुल फील्ड एनहैंस्ड ऑयल रिकवरी (ईओआर) पॉलीमर प्रोजेक्‍ट परियोजना का घर है। यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना है। इसके साथ ही एक बड़ा एल्कलाइन सरफेक्‍टेंट पॉलिमर (एएसपी) प्रोजेक्ट भी डिजाइन किया जा रहा है, जो अगले कुछ सालों में अस्तित्व में आएगा। यह क्षेत्र मंगला पाइपलाइन के स्टार्टिंग पाइंट को चिन्हित करता है। यह दुनिया की लंबी लगातार गर्म और इंसुलेटेड पाइप लाइन है, जिससे राजस्थान के खेतों से कच्चा तेल गुजरात की रिफाइनरीज तक ले जाया जाता है। रावा फील्ड भारत के सबसे बड़े ऑफशोर एसेट्स में से एक है। यह बेहतरीन जलाशय प्रबंधन और अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने का उदाहरण है, जिसके परिणाम स्वरूप 50 फीसदी से ज्यादा एसेट्स को रिकवर किया जा सका है। यह नई साझेदारी भारत में ऊर्जा स्वायत्तता को हासिल करने की केयर्न की कोशिश में अगला कदम है।

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