मर्द नहीं जान सकते महिलाओं का दर्द

men-cant-read-womens-emotions-study-confirmsन्यूयार्क। मर्दो के महिलाओं को नहीं समझ पाने की महिलाओं की शिकायतों में यकीनन सच्चाई तो जरूर है। एक ताजा शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने इस बात के प्रमाण सामने रखे हैं कि महिलाओं की आंखों और चेहरे को देखकर उनकी भावनाएं समझ पाने में पुरुष हमेशा अक्षम होते हैं।

इस शोध में पाया गया कि पुरुषों को महिलाएं की आंखें देखकर उनके मनोभावों को समझने में पुरुषों की आंखों से उनकी बात समझने के मुकाबले दोगुनी मुश्किल होती है। यहां तक कि पुरुष जब महिलाओं की आंखों में देख रहे होते थे तब भी उनके अपने दिमाग के बहुत कम हिस्से ही सक्रिय थे। उनकी अपनी भावनाएं भी न्यून ही रहीं। पुरुषों ने कुछ अन्य शोधों में भी माना कि उन्हें महिलाओं के मन को पढ़ने में बहुत परेशानी हुई और वह इस बात का कतई अंदाजा नहीं लगा पाते कि कोई महिला क्या सोच रही है।

लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों को क्या वाकई महिलाओं को समझने में दिक्कत होती है इसके वैज्ञानिक प्रमाण हासिल करने के लिए बोशम स्थित एलडब्लूएल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल बोरिस शेफर ने अपने साथियों के साथ एक प्रयोग किया। इस प्रयोग में 21 से 52 साल की आयु के 22 पुरुषों को शामिल किया गया। इसके बाद इन लोगों से 36 जोड़ी आंखों की तस्वीरों को बारी-बारी देखकर उसके बारे में बताने को कहा गया है। इसमें से आधी तस्वीरें महिलाओं की थीं। इन सभी की आंखें देखकर उनकी भावनाओं को पढ़ना था। इन सभी पुरुषों को महिलाओं की आंखों को पढ़ने में ज्यादा वक्त लगा। और फिर भी वह उनकी भावनाओं को समझने में नाकाम रहे। हालांकि इन पुरुषों को पुरुषों की आंखों वाली तस्वीरों को पढ़ने में उनके मस्तिष्क के विरोध और भय के भाव अधिक जाग्रत हुए। हालांकि महिलाओं की आंखों की तस्वीरों को देखते हुए उनके मस्तिष्क में ऐसी कोई भावनाएं जाग्रत नहीं होती हैं।

उनकी भावनाओं को पहचानने में उन्होंने केवल दो शब्दों का प्रयोग किया डरी हुई या फिर थकी हुई। लेकिन महिलाओं की आंखों की जो तस्वीरें उन्हें दिखाई गई थीं वह सकारात्मक, तटस्थ और नकारात्मक भावनाएं थीं। वैसे भारत जैसे तीसरी दुनिया के देश हों या फिर अत्याधुनिक पश्चिमी देश, सभी जगह पुरुषों के स्त्रियों को ना समझ पाने की शिकायत हमेशा रहती है। ये बात दोनों पक्षों को ही हमेशा से स्वीकार रही है। लेकिन पहली बार शारीरिक आधार पर वैज्ञानिक तरीके से इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं। पुरुषों के मस्तिष्क की गतिविधि ही ऐसी नहीं कि वह महिलाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।

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