अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे। कुछ ऐसा ही था ये प्रोग्राम। वर्तिका और अनिला जिन्हें खुद नृत्य की एबीसीडी नहीं मालूम वे तो थीं निर्णायक और निर्णय कि किया तो इतना विवादास्पद कि जिनका उत्तम प्रदर्षन रहा उन्हें माक्र्स ही कम दिए। क्या ये आयोजन किसी व्यक्ति विषेश को खुष करने के लिए किया गया था।

ना संगत थी और न ही समन्वय सोमरतन जी जो समय की पाबंदी का दम भरते हैं, क्या उन्हें यहां समय का ध्यान नहीं रहा, और साउंड सिस्टम तो माषा अल्लाह। अनंत भटनागर जी से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उनके विद्यालय में इतना घटिया कार्यक्रम होगा। जहां कला और बच्चों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ होता हो ऐसे कार्यक्रमों से आप क्या संदेष देना चाहते हैं। क्यों राज्य की षैक्षिक और सांस्कृतिक राजधानी को बदनाम करते हो। बच्चों के साथ भेदभाव देखकर सोमरतन जी चुप क्यों रहे! यह सबसे बड़ा प्रष्नचिन्ह इस आयोजन पर हैं। क्या आयोजकों और निर्णायकों में इतना साहस है कि वे उन बच्चों से माफी मांगें जिनकी भावनाओं को उन्होंने ठेस पहुंचाई है।
Sarla Sharma
Freelancer at MEDIA DEVELOPMENT OF INDIA, Editor in Chief at Ajmer Media and Head Mistress at Royal International Academy
behatreen aalekh